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Korba : “रेत से तेल… और ट्रैक्टर से फॉर्च्यूनर! कोरबा के ‘धुरंधरों’ का ये कैसा चमत्कार?”

कोरबा।Korba sand smuggling:  फिल्म धुरंधर के अजय सान्याल का एक डायलॉग बड़ा चर्चित है…“आदमी का फर्ज है लड़ना… अपने मकसद, सपनों, हक और अपनों के लिए।” अब ये डायलॉग सिनेमा हॉल से निकलकर सीधे कोरबा की रेत घाटों तक पहुंच गया है और वहां कुछ लोग इसे जीवन का सिद्धांत बता रहे है। ये बात अलग है कि उनका उसूल सिर्फ चोरी के रेत से इमारत खड़ा करना है। जहां एक तरफ लोग UPSC की किताबों में सिर खपाते हैं, वहीं सीतामणी घाट के विद्वान सीधे “नदी विज्ञान” में पीएचडी कर रहे हैं।

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कहानी सीतामणी रेत घाट के डॉन कहे जाने वाले(Sartaj gang ) सरताज की है जो कभी एक ट्रैक्टर से  रेत चोरी कर रोजी-रोटी का जुगाड़ करता था … आज रेत चोरी की  दुनिया का धुरंधर बनकर फॉर्चूनर का सफर तय करते हुए इठलाते घूम रहा  है। उनके तस्करी को देख जनमानस कहने लगी है मेहनत रंग लाए या न लाए लेकिन चोरी की रेत जरूर रंग लाती है , तभी तो इस रेत से तेल निकालने के खेल में मेयर से लेकर मंत्री के मित्र मंडल तक का पसंदीदा कारोबार बना है। इसीलिए अब ये बात करती बोर है – “मेहनत करोगे तो फल मिलेगा”

अब तो गली गली में शोर है “मेहनत छोड़ो, ट्रैक्टर जोड़ो, फल अपने आप फॉर्च्यूनर में बदल जाएगा ”
खबरीलाल की माने तो सरकार बदलने के बाद भी रेत से तेल निकालने सरताज गिरोह का खेल जारी है। सीतामणी घाट से दिनभर उड़ती रेत की धूल, माइनिंग विभाग और पुलिस दोनों की इमेज को धूल चटा रही है। ट्रैक्टर ऐसे दौड़ते हैं जैसे रोड नहीं, रनवे हो। दिन भर फर्राटे भरते ट्रैक्टर और सिंडिकेट गिरोह की दबंगई से ऐसा लगता है सरकार भले ही भाजपा की है लेकिन, राज अभी भी रेत सिंडीकेट सरताज का ही है। कहा तो यह भी जा रहा कि रेत कारोबार से जुड़े कारोबारियों को न्यू फार्चूनर में बैठकर सरताज अजय देवगन के डायलॉग को दोहराते हुए कहने लगा है ” धंधे के लिए मुझे जमीन की जरूरत नहीं है, हसदेव नदी है न मेरे पास..!

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