Korba Breaking: रिश्वत लेते पकड़े गए नगर निगम इंजीनियर दोषमुक्त, 2 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला

News Power Zone
2 Min Read

कोरबा।Korba Nagar Nigam Engineer Bribery Case Verdict  कभी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई में रंगे हाथ पकड़े गए नगर निगम के दो इंजीनियर अब अदालत ने दोषमुक्त कर दिया हैं। करीब दो साल पुराने इस मामले में कोर्ट के फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

क्या था मामला

वार्ड क्रमांक 15, गोरहीपारा निवासी ठेकेदार मानक साहू ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि नगर निगम दर्री जोन में पदस्थ सहायक अभियंता डी.सी. सोनकर उसके निर्माण कार्यों के बिल भुगतान के एवज में कमीशन मांग रहे थे।

ठेकेदार के मुताबिक, उसके रनिंग और फाइनल बिल मिलाकर करीब 21 लाख रुपये लंबित थे। आरोप है कि भुगतान के बदले 2 प्रतिशत कमीशन यानी 42 हजार रुपये मांगे गए। बाद में सौदेबाजी के बाद रकम 35 हजार रुपये तय हुई।

ऐसे बिछा जाल

शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी टीम ने ट्रैप प्लान किया। 18 जून को ठेकेदार जैसे ही रकम देने पहुंचा, सोनकर ने अपने अधीनस्थ सब इंजीनियर देवेंद्र स्वर्णकार को पैसे लेने के लिए कहा।

जैसे ही ठेकेदार ने दर्री जोन कार्यालय में 35 हजार रुपये दिए, एसीबी टीम ने देवेंद्र स्वर्णकार को रंगे हाथ पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद मामला सुर्खियों में आ गया था।

 

करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट के फैसले के साथ ही एसीबी की उस कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो गए, जिसे उस वक्त बड़ी सफलता माना जा रहा था।

सवाल बाकी

इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आरोपी दोषी नहीं थे, तो फिर ट्रैप कार्रवाई में कमी कहां रह गई? और अगर सबूत कमजोर थे, तो जांच एजेंसी की तैयारी पर भी सवाल उठना तय है।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सिर्फ गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि मजबूत साक्ष्य और ठोस जांच ही अंतिम फैसला तय करती है।

Share This Article