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Cultural Pride : मामा का प्रेम…! जायल में भरे 1 करोड़ 61 लाख कैश मायरा…ब्राह्मण भाइयों ने रचा कीर्तिमान

सदियों पुरानी परंपरा को मिला नया आयाम

नागौर, 10 फरवरी। Cultural Pride : राजस्थान के नागौर जिले के जायल कस्बे में एक बार फिर मायरा चर्चा का केंद्र बन गया है। इस बार इतिहास रचने वाले जाट समाज नहीं, बल्कि ब्राह्मण समाज के दो भाई हैं। जायल निवासी ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के बेटे नीलेश की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का भव्य मायरा भरकर समाज में नई मिसाल कायम की है। इसे ब्राह्मण समाज का अब तक का सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है।

यह पारंपरिक रस्म जायल के माहेश्वरी भवन में विधि-विधान से संपन्न हुई। पिता श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में दोनों भाइयों ने बहन गायत्री देवी को चुनरी ओढ़ाकर मायरा भरा। यह आयोजन न केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक बना, बल्कि ब्राह्मण समाज की एकता, संस्कार और परंपराओं को भी दर्शाता नजर आया।

सदियों पुरानी परंपरा को मिला नया आयाम

नागौर जिले के जायल-खिंयाला क्षेत्र में मायरा भरने की परंपरा सदियों पुरानी है। यहां मामा अपनी बहन के बच्चों की शादी में दिल खोलकर उपहार देते हैं, जिसे महिलाएं पारंपरिक गीतों ‘जायल-खिंयाला रो मायरो’ के माध्यम से गाती हैं। पहले बड़े मायरे मुख्य रूप से जाट समाज में देखने को मिलते थे, लेकिन अब अन्य समाज भी इस परंपरा को उसी भव्यता से आगे बढ़ा रहे हैं।

हाल के वर्षों में करोड़ों के मायरे

पिछले कुछ वर्षों में नागौर जिले में कई बड़े मायरे चर्चा में रहे हैं, जिनमें करोड़ों की जमीन, नकद राशि, सोना-चांदी तक शामिल रहा है। हाल ही में 21 करोड़ रुपये से अधिक के मायरे भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। ऐसे में ब्राह्मण समाज द्वारा भरा गया यह मायरा खास माना जा रहा है, जो समाज में नई सोच और सहभागिता का प्रतीक बन गया है।

आज भी जीवंत हैं राजस्थान की रस्में

जायल क्षेत्र में इस ऐतिहासिक मायरे की हर ओर चर्चा है। यह आयोजन न केवल सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बना, बल्कि यह भी साबित करता है कि राजस्थान की परंपराएं आज भी जीवंत हैं। यहां रिश्तों की मजबूती का आधार धन नहीं, बल्कि भावनाएं, संस्कार और आपसी प्रेम हैं।

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