
कोरबा।OPS and Regularization Demand by Janta Union छत्तीसगढ़ के विद्युत कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पुरानी पेंशन योजना (OPS), संविदा कर्मियों के नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग के विरोध में ‘विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन’ ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की सुगबुगाहट तेज कर दी है। इसी कड़ी में रविवार को यूनियन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और सांसद ज्योत्स्ना महंत से मुलाकात कर पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

‘रोशनी के सिपाहियों’ की सुरक्षा दांव पर
यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने नेता प्रतिपक्ष को बताया कि वर्ष 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारी आज भी सामाजिक सुरक्षा (OPS) के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 10 वर्षों से जान जोखिम में डालकर काम कर रहे संविदा कर्मचारियों को यदि नियमित नहीं किया गया, तो विभाग में दुर्घटनाओं का जोखिम और बढ़ेगा। द्विवेदी ने स्पष्ट कहा कि ठेका प्रथा न केवल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि यह बिजली कंपनियों को निजीकरण के अंधेरे में धकेलने की साजिश है।

प्रमुख मांगें जिन पर मचा है घमासान
OPS का क्रियान्वयन: वर्ष 2004 के बाद नियुक्त नियमित कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ मिले।
नियमितीकरण: 10 साल से कार्यरत संविदा कर्मियों को तत्काल नियमित सेवा में लिया जाए।
सीधी भर्ती: आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा बंद कर रिक्त पदों पर नियमित भर्ती हो।
स्थानीय प्राथमिकता: कोरबा के निर्माणाधीन 1320 मेगावाट पावर प्लांट में केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।
सियासी गलियारों में गूंज: महंत बोले- हक मिलना चाहिए
कर्मचारियों की व्यथा सुनने के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने उनकी मांगों का समर्थन किया। डॉ. महंत ने कहा, “विद्युत कर्मचारी प्रदेश के ‘रोशनी के सिपाही’ हैं। पिछली सरकार की घोषणा के बावजूद ओपीएस लागू न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। संविदा कर्मियों के भविष्य और स्थानीय युवाओं के रोजगार के विषय पर हम सरकार को घेरेंगे।”
अभियान का बढ़ता दायरा
अनिल द्विवेदी के नेतृत्व में जारी इस अभियान ने अब जोर पकड़ लिया है। यूनियन अब तक 40 से ज्यादा मंत्रियों, विधायकों और सांसदों तक अपनी बात पहुंचा चुकी है। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से सम्मेलाल श्रीवास, उदय राठौर, सागर देवांगन और लक्ष्मी प्रसाद यादव सहित दर्जनों पदाधिकारी शामिल थे।



