coal-game-river: ज़मीन से नहीं, अब ‘सिस्टम’ से निकलता है कोयला: नदी पार थाने का अजब खेल

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coal-game-river-side-police-st कोरबा “लुका-छिपी बहुत हुई, सामने आ जा ना…” लता दीदी का यह गीत कभी प्यार-मोहब्बत की मासूमियत पर लिखा गया होगा। लेकिन नदी उस पार के थाने में आजकल यह गाना कुछ अलग अंदाज में गाया जा रहा है। यहां साहब जब ईमानदारी, अनुशासन और कानून का लंबा-चौड़ा भाषण देते हैं, तो पीछे से कोयले की धूल उड़ाते ट्रकों की आवाज कुछ और ही कहानी कहती है।

 

एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों की गोद में बैठे इस थाने में इन दिनों बड़ा दिलचस्प खेल चल रहा है। इधर नदी उस पार ‘काली लक्ष्मी’ निकालने वाले जान हथेली पर रखकर रात भर कोयला खींच रहे हैं, उधर साहब नियम-कायदों का पर्दा ओढ़कर बैठे हैं। असल में कोयला काला जरूर होता है, लेकिन इसकी चमक बड़े-बड़ों की नीयत बदल देती है। अब जब घर बैठे ‘ऊपरी कमाई’ हो रही है, तो मौका लपकने में ही मलाई है।

 

इस खबर का क्लाइमैक्स अभी बाकी है। कहानी में नया मोड़ तब आया, जब कोयला चोरी रोकने गए एसईसीएल कर्मचारी की पिटाई हो गई। मामला सोशल मीडिया तक पहुंचा और सवाल उठने लगे। कोयला-राग के एक जानकार ने खबरीलाल को बताया, तुम नाहक परेशान हो रहे हो… पहले कोयला जमीन से निकलता था, अब सिस्टम से निकलता है। किसकी नजर बचाकर कितना निकला, यही असल सवाल है।

 

अब सिस्टम ऐसा है कि साहब कानून का पाठ पढ़ाते हैं, लेकिन ‘काली लक्ष्मी’ की गाड़ियां बिना ब्रेक दौड़ती रहती हैं। कागजों में सब साफ-सुथरा दिखता है, लेकिन रात होते ही सिस्टम की चौखट से ऐसा रास्ता निकलता है, जहां नियम खुद रास्ता पूछते फिरते हैं। अब देखना यह है कि साहब की यह ‘लुका-छिपी’ कब तक चलती है।

 

 

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