
कोरबा। Korba Congress रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से त्याग और किफायत बरतने की अपील पर कोरबा जिला कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे अपनी नाकामियों को ढंकने और जनता को ‘अच्छे दिनों’ के बदले ‘आर्थिक तंगी’ में धकेलने का एक नया शिगूफा करार दिया है।
“चुनाव खत्म, जुमले शुरू”: मुकेश राठौर
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने प्रधानमंत्री की अपील के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सुझाव ठीक पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद आया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2013 के मुकाबले 2026 में दाल, चावल, आटा, तेल और रसोई गैस के दाम आसमान छू रहे हैं।
सोना हुआ भारी
सोने की कीमतों में 50% की वृद्धि हो चुकी है। पिछले 3 महीनों से पेट्रोल-डीजल की किल्लत और रसोई गैस के लिए जनता घंटों कतारों में खड़ी होने को मजबूर है।
“खाद कम डालो” वाले सुझाव पर ठहाके!
ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान ने प्रधानमंत्री के ‘खाद कम उपयोग’ करने वाले सुझाव को हास्यास्पद बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा “सरकार खाद की कमी को दूर करने में नाकाम है, इसलिए किसानों को खाद कम डालने की सलाह दे रही है। कोई भी किसान अपनी फसल के साथ खिलवाड़ नहीं करेगा। यह सुझाव किसानों का भला नहीं, बल्कि उनका मजाक उड़ाना है।”
मंत्रियों के प्रोटोकॉल पर सवाल
ब्लॉक अध्यक्षों (पालुराम साहू, राजेंद्र तिवारी, ए.डी. जोशी, बसंत चंद्रा) ने ‘पहले आप’ की रणनीति अपनाते हुए भाजपा के जनप्रतिनिधियों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि:
छत्तीसगढ़ में महज 12 मंत्रियों के लिए सालभर में 50 करोड़ रुपये के पेट्रोल-डीजल का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री की अपील का पालन सबसे पहले भाजपा के सांसद, विधायक और मंत्रियों को अपने प्रोटोकॉल और वाहनों का त्याग कर करना चाहिए।
जनता के कंधों पर सरकार का बोझ
मंडल अध्यक्षों (मनीष शर्मा, प्रदीप जायसवाल सहित अन्य) ने संयुक्त रूप से कहा कि जब भी देश पर आर्थिक दबाव आता है, मोदी जी अपनी समस्याओं को जनता के मत्थे मढ़कर खुद ‘समस्या मुक्त’ हो जाते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह अपील केवल देश की चरमराई अर्थव्यवस्था से ध्यान भटकाने का एक जरिया है।कोरबा कांग्रेस के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे प्रधानमंत्री की इस अपील को जनहित में नहीं, बल्कि सरकार की विफलता मानते हैं। अब देखना यह है कि भाजपा इस ‘टैक्स और त्याग’ की राजनीति पर क्या जवाब देती है।



