बिलासपुर

Baloda Bazar Violence Case : बलौदाबाजार हिंसा केस में बड़ा मोड़…! अमित बघेल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत

रायपुर, 04 जुलाई। Baloda Bazar Violence Case : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित बलौदाबाजार कलेक्टोरेट आगजनी और हिंसा मामले में नया कानूनी मोड़ आया है। जेल में बंद आरोपी अमित बघेल ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह (यदि आपके आधिकारिक आदेश में नाम अलग हो तो उसी के अनुसार संशोधित करें) की पीठ ने मामले को पहले से लंबित एक अन्य संबंधित याचिका के साथ टैग (मर्ज) करने का निर्देश दिया है। अब दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होगी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

3 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं की टीम ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और याचिकाकर्ता को दस्ती नोटिस (व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील कराने) की भी अनुमति दी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 10 जून 2024 को बलौदाबाजार में हुई हिंसा और कलेक्टोरेट आगजनी से जुड़ा है। गिरौदपुरी धाम के अमर गुफा में सतनामी समाज के पवित्र प्रतीक जैतखाम को नुकसान पहुंचाए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में लोग बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में एकत्र हुए थे।

अभियोजन के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई और उग्र भीड़ ने पुलिस पर हमला किया। इसके बाद कलेक्टोरेट, पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर और कई सरकारी वाहनों में आग लगा दी गई। इस घटना में सरकारी संपत्ति को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था।

हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत?

अमित बघेल ने हाई कोर्ट में दावा किया था कि घटना के समय वे रजिस्ट्रार कार्यालय में एक रजिस्ट्री कार्य के सिलसिले में मौजूद थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति की पुष्टि नहीं करते। 19 मई 2026 को बिलासपुर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश कुमार वर्मा की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

अभियोजन का दावा

अभियोजन पक्ष ने साइबर सेल की रिपोर्ट, पुलिस अधिकारियों के बयान और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर आरोप लगाया कि अमित बघेल और अजय यादव कथित रूप से भीड़ को उकसाने और आगजनी के लिए प्रेरित करने वालों में शामिल थे। अभियोजन ने अदालत को यह भी बताया कि अमित बघेल और अजय यादव के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

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