
Raipur City News: रायपुर। कमल विहार (कौशल्या विहार) के बाद रायपुर विकास प्राधिकरण RDA करीब 16 साल बाद नई नगर विकास योजना लेकर आया है। नवा रायपुर के पास पिरदा और तुलसी गांव की 143 हेक्टेयर करीब 353.4 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित इस योजना में भू-स्वामियों को 40% विकसित जमीन वापस देने का प्रावधान है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग ने 11 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में इस योजना से संबंधित अधिसूचना प्रकाशित की है। सरकार ने पिरदा-तुलसी में नगर विकास योजना बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना से जुड़े भू-स्वामियों से दावे-आपत्तियां मांगी गई हैं।
दिसंबर तक प्रोजेक्ट ऑनबोर्ड किया जाएगा
आरडीए के सीईओ अवनीश शरण ने बताया कि विकास प्राधिकरण की ओर से नगर विकास योजना का प्रकाशन किया गया है। इसका राजपत्र में भी प्रकाशन हो चुका है। आरडीए शहर के ऐसे एरिया को मास्टर प्लान के अनुसार विकसित करने की योजना बना रहा है, जहां सड़कें और अन्य विकास कार्य प्रस्तावित हैं, लेकिन किसी कारण से अभी तक विकास नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि इसी योजना के तहत पिरदा और तुलसी में नगर विकास योजना पर काम किया जा रहा है। इस क्षेत्र में पहले एमआर-43 एक सड़क भी यहां से गुजर रही है। पिरदा-तुलसी योजना का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। आरडीए की कोशिश है कि दिसंबर तक प्रक्रिया पूरी कर प्रोजेक्ट को ऑनबोर्ड कर दिया जाए।
40% जमीन विकसित करके लौटाने की तैयारी
आरडीए के मुताबिक प्रस्तावित योजना में भू-स्वामियों को 40% विकसित जमीन वापस देने का प्रावधान है। यानी योजना के तहत जमीन का नियोजन और विकास करने के बाद भू-स्वामियों को विकसित क्षेत्र में उनके हिस्से की जमीन लौटाई जाएगी।
प्रस्तावित टाउनशिप में सड़क, नाली, जलापूर्ति, सीवरेज और बिजली जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा पार्क और दूसरी जरूरी आधारभूत सुविधाओं के लिए भी जमीन का प्रावधान रहेगा। आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग-अलग क्षेत्र विकसित किए जाएंगे।
कमियों से लिया सबक
आरडीए की पिछली बड़ी नगर विकास योजना कमल विहार थी। इस योजना के दौरान आरडीए को वित्तीय और जमीन से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। एक समय आरडीए पर करीब 400 करोड़ रुपए का कर्ज होने की बात सामने आई थी। हालांकि अब प्राधिकरण कर्ज से उबर चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि नई योजना तैयार करते समय कमल विहार में सामने आई समस्याओं को ध्यान में रखा गया है। जमीन के नियोजन से लेकर विकास कार्य और भू-स्वामियों को विकसित जमीन लौटाने तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने पर जोर दिया जा रहा है।















