
कोरबा। एसईसीएल के लिए कम करने वाली नीलकंठ कंपनी के बाउंसरों के आगे पुलिस हाथ पर हाथ धरकर बैठ गई है। कुसमुंडा कोल माइंस के भू विस्थापितों के साथ हो रहे अन्याय के वीडियो को देख जनमानस चर्चा करते हुए कहने लगे है ये क्या हो रहा एसपी साहब, कहां है न्याय की बात..!
एसईसीएल कुसमुंडा खदान क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भूविस्थापित किसानों और मजदूरों के विरोध को दबाने के लिए जिला प्रशासन की सहमति से नीलकंठ कंपनी के बाउंसरों की तैनाती की गई है। आरोप है कि ये बाउंसर अब विरोध करने वाली महिलाओं और गरीब मजदूरों को धौंस जमाने और डराने का काम कर रहे हैं।सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि नीलकंठ कंपनी के बाउंसर भूविस्थापितों को आंखें दिखा रहे हैं, जबकि मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी बैठी है। इस दृश्य को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं—“ये क्या हो रहा है एसपी साहब? आखिर न्याय की बात कहां गई?”
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन गंवाने वाले किसान रोज़गार और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ सुनने की बजाय उन पर बाउंसरों का दबाव बनाया जा रहा है। प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से इलाके में रोष और असंतोष फैल गया है।कुसमुंडा खदान में बाउंसरों की मौजूदगी और पुलिस की चुप्पी ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुलगते सवाल
- 1. क्या खदान में उतरी उन महिला बाउंसरों के पास VTC ट्रेनिंग सर्टिफिकेट है?
- 2. क्या नीलकंड कंपनी ने इन महिलाओं का B-Form भरा है?
- 3. क्या कंपनी ने महिलाओं की कौशल (स्किल) के आधार पर मजदूरी तय की है?
- 4. खदान में काम करने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण क्या इन्हें उपलब्ध कराए गए हैं?
- 5. क्या इन बाउंसरों की हाजिरी MTK रजिस्टर में दर्ज हो रही है?
- जानकारों की माने तो अगर इन सभी बिंदुओं का पालन नहीं हो रहा, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि SECL कुसमुंडा खदान में किसी अनधिकृत व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति कैसे दी गई? और फिर… कहां है केंद्रीय सुरक्षा बल (CISF) जिसकी जिम्मेदारी खदान की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की होती है?



