कोरबा

Shivay Hospital : कोरबा शिवाय हॉस्पिटल में मानवता का महादान…! सैकड़ों लोगों ने बढ़ाया मदद का हाथ…जनसहयोग का अभूतपूर्व अभियान

डॉ. मित्तल बोले- यह दान नहीं, किसी की जिंदगी बचाने का संकल्प है

कोरबा, 15 जून। Shivay Hospital : कहते हैं कि जब किसी अस्पताल की दहलीज पर कोई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा होता है, तब डॉक्टर के पर्चे पर लिखी ‘एक यूनिट ब्लड’ की मांग सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि उस परिवार की आखिरी उम्मीद बन जाती है। खून की एक-एक बूंद के लिए तड़पते अपनों को देखकर दिल बैठ जाता है। ​इसी दर्द को महसूस करते हुए और किसी बेबस आंख में आंसू न आने देने के संकल्प के साथ, विश्व रक्तदाता दिवस पर नया बस स्टैंड स्थित शिवाय हॉस्पिटल में एक बेहद भावुक और सफल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। ​इस महायज्ञ की सफलता के बाद, शिवाय हॉस्पिटल परिवार ने नम आंखों और कृतज्ञ हृदय से उन सभी देवदूतों (रक्तदाताओं) और सामाजिक संस्थाओं का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने आगे बढ़कर किसी अजनबी को नया जीवन देने का संकल्प लिया।

जब समाज ने मिलकर लिखा जिंदगी का नया अध्याय

​रक्तदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गिरती हुई सांसों को थामने का जरिया है। इस शिविर में जब युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी बाहें आगे बढ़ाईं, तो लगा मानो पूरा कोरबा किसी मरते हुए को जिंदगी की गारंटी देने उठ खड़ा हुआ है। ​इस पुनीत कार्य को सफल बनाने में शहर की धड़कन कहे जाने वाले कई समाजों और संस्थाओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन ने इन सभी के निस्वार्थ समर्पण को नमन करते हुए उन्हें सम्मानित किया। ​ सिख समाज : जिन्होंने हमेशा की तरह लंगर की सेवा भाव को जीवन बचाने की सेवा में बदल दिया। ​ सिंधी समाज : संकट की घड़ी में भाईचारे और संवेदना की एक नई मिसाल पेश की। ​ हिंदू क्रांति सेना : युवाओं की उस ऊर्जा को सही दिशा दी, जो किसी का बुझता हुआ घर का चिराग रोशन कर सके। ​ संवेदना ब्लड बैंक : जिनके डॉक्टरों और कर्मचारियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ रक्त की हर बूंद को सुरक्षित किया। ​ शिवाय हॉस्पिटल के चिकित्सक एवं स्टाफ: जिन्होंने दिन-रात एक कर इस पूरे आयोजन को एक पारिवारिक जिम्मेदारी की तरह निभाया।​

“यह दान नहीं, किसी का उजड़ता संसार बचाने का संकल्प है”

​ डॉ. मित्तल (शिवाय हॉस्पिटल) ने बेहद भावुक शब्दों में कहा “जब कोई मां अपने बच्चे के लिए, या कोई मुफलिज अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए खून की गुहार लगाता है, तब जाति, धर्म और ऊंच-नीच की सारी दीवारें ढह जाती हैं। रक्तदान केवल एक दान नहीं, बल्कि मानवता की वह डोर है जो दो अनजाने दिलों को जिंदगी के अहसास से जोड़ देती है।” ​अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि एक यूनिट रक्त कई परिवारों को बिखरने से बचा लेता है। समाज के लोगों ने जिस तरह बढ़-चढ़कर इस महादान में हिस्सा लिया, उसने साबित कर दिया कि आज भी इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

मानवता की यह श्रृंखला टूटने न पाए…

​शिवाय हॉस्पिटल परिवार ने सभी सहयोगी संस्थाओं, स्वयंसेवकों और अपनी रगों का खून देकर दूसरों की रगों में जिंदगी दौड़ाने वाले रक्तदाताओं का अभिनंदन किया है। अस्पताल ने भावुक अपील करते हुए कहा कि आज भले ही यह शिविर संपन्न हो गया है, लेकिन जिंदगी बचाने का यह सिलसिला रुकना नहीं चाहिए। भविष्य में भी जब किसी को जरूरत पड़े, तो हमारा हाथ हमेशा देने के लिए आगे उठना चाहिए।

शिवाय हॉस्पिटल परिवार का संदेश

​”रक्तदान को जीवनदान बनाएं… किसी की थमती सांसों की आस जगाएं, और मानवता की इस अटूट श्रृंखला को आगे बढ़ाएं।”

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