
कोरबा।Korba bear and cubs death case जिले में भालू और उसके दो शावकों की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन, कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बिजलीकर्मी पर की गई कार्रवाई का विरोध जताया है और वन विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्राकृतिक आपदा का बताया मामला
ज्ञापन के अनुसार 26 मार्च 2026 को जिले के वन क्षेत्र में आंधी-तूफान के दौरान एक पेड़ बिजली लाइन पर गिर गया। इससे तार जमीन के संपर्क में आ गया। इसी दौरान जंगल में घूम रहे एक मादा भालू और उसके दो शावक करंट की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई। यूनियन का कहना है कि यह घटना प्राकृतिक आपदा के कारण हुई, इसमें किसी कर्मचारी की लापरवाही नहीं थी।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
यूनियन ने आरोप लगाया है कि बिजली लाइन क्षतिग्रस्त होने की जानकारी समय पर संबंधित विभाग को नहीं दी गई, जिससे सुधार कार्य नहीं हो सका। इसके बावजूद पूरे मामले में बिजलीकर्मी को आरोपी बनाकर कार्रवाई की गई, जो न्यायसंगत नहीं है।
साक्ष्य मिटाने का भी आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना के बाद मौके पर पहुंचे कर्मचारी ने फोटो और वीडियो के रूप में साक्ष्य जुटाए थे, लेकिन कथित तौर पर वन विभाग के अधिकारियों द्वारा मोबाइल से यह सामग्री हटवा दी गई। यूनियन ने इसे गंभीर विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
चार मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
यूनियन ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित कर्मचारी पर दर्ज प्रकरण समाप्त किया जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और साक्ष्य मिटाने के आरोप में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग की जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी है।



