SEB Ash Dam : राखड़ डैम बंद कर सड़क पर उतरे 3 गांवों के ग्रामीण…! 15 साल पुराने नौकरी के वादे को लेकर आर-पार की लड़ाई…यहां देखें VIDEO
संविदा नौकरी से नाराज ग्रामीण
कोरबा, 08 अगस्त। SEB Ash Dam : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह, कोरबा पूर्व के राखड़ बांध को लेकर तीन गांवों के प्रभावित परिवारों ने मोर्चा खोल दिया है। गोढ़ी, बेन्द्रकोना और पड़रीपानी के ग्रामीणों ने शुक्रवार को पंडरीपानी स्थित CSEB राखड़ डैम को बंद करा दिया और वहीं अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के करीब 15 साल बाद भी रोजगार का वादा पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है। प्रभावित परिवार अब नियमित नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन पर उतर आए हैं।
15 साल से अधूरा है नौकरी का वादा
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2007 में राखड़ बांध निर्माण के लिए उनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके बाद वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि अर्जित भूमि के एवज में 308 प्रभावित कुटुंबों के एक-एक सदस्य को अर्हता के अनुसार CSPGCL में नियमित पद पर नियुक्ति दी जाएगी।
ग्रामीणों का कहना है कि संचालक मंडल ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। लेकिन करीब 15 साल बीत जाने के बाद भी 308 प्रभावित परिवारों में से आधे से अधिक को ही रोजगार मिल पाया है। शेष परिवारों का आरोप है कि उन्हें नियमित नौकरी देने के बजाय केवल तीन साल की संविदा का प्रस्ताव दिया जा रहा है।
संविदा नौकरी से नाराज ग्रामीण
प्रभावित परिवारों के मुताबिक, संविदा व्यवस्था में हर साल अनुबंध का नवीनीकरण किया जाएगा और तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद कंपनी में नियमित नियुक्ति की कोई बाध्यता नहीं है।
ग्रामीण इसी व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं और पूर्व में नौकरी प्राप्त कर चुके प्रभावित परिवारों की तर्ज पर नियमित पद पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
राखड़ डैम बंद कर शुरू किया आंदोलन
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने 7 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके बाद शुक्रवार को गोढ़ी, बेन्द्रकोना और पड़रीपानी के ग्रामीण राखड़ डैम पहुंचे और उसका काम बंद करा दिया।
इसके बाद ग्रामीण मौके पर ही धरने पर बैठ गए। बताया जा रहा है कि करीब 46 परिवार अभी भी रोजगार के मुद्दे को लेकर प्रभावित हैं। कुछ ग्रामीण संविदा पर काम कर रहे हैं, जबकि अन्य ने नियमित नौकरी नहीं मिलने के कारण काम करने से इनकार कर दिया है।
जमीन गई, अब रोजगार का इंतजार
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2007 में अधिग्रहित की गई उनकी पैतृक जमीन ही परिवार की आय का प्रमुख स्रोत थी। जमीन जाने के बाद उनके सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि 2010 में किए गए रोजगार के वादे के बावजूद अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। इसके अलावा प्रभावित गांवों में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं भी बनी हुई हैं।
ग्रामीणों की तीन प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन और CSPGCL के सामने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं, पूर्व में नौकरी पा चुके प्रभावितों की तर्ज पर शेष पात्र प्रभावित परिवारों के सदस्यों को नियमित पद पर नियुक्ति दी जाए। तीन साल की संविदा व्यवस्था तत्काल खत्म की जाए। प्रभावित गांवों में बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से अपने अधिकार और रोजगार के वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। अब वे मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
यह राखड़ बांध CSPGCL की ताप विद्युत परियोजना का हिस्सा है। भूमि अधिग्रहण के समय पुनर्वास और रोजगार से जुड़े वादे किए गए थे। अब प्रभावित परिवार उन्हीं वादों को पूरा कराने के लिए आंदोलन पर उतर आए हैं।





