Encroachment Footpath : बिलासपुर में फुटपाथ गायब…! हाईकोर्ट सख्त…नगर निगम आयुक्त से शपथपत्र के साथ मांगा जवाब
फुटपाथ पर कब्जे से पैदल चलना मुश्किल
बिलासपुर, 08 अगस्त।Encroachment Footpath : बिलासपुर में सड़क निर्माण के दौरान फुटपाथ के गायब होने, अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने नगर निगम आयुक्त से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने निगम आयुक्त को शपथपत्र के साथ यह बताने का निर्देश दिया है कि शहर के फुटपाथों को अतिक्रमण से बचाने और पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
फुटपाथ पर कब्जे से पैदल चलना मुश्किल
याचिकाकर्ता संस्कार राजपूत ने जनहित याचिका में आरोप लगाया है कि सार्वजनिक फुटपाथों पर अवैध कब्जे और यातायात व्यवस्था में लापरवाही के कारण बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, नगर निगम और पुलिस प्रशासन से कई बार शिकायत करने और RTI के जरिए जानकारी मांगने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
याचिका में नेहरू नगर से दर्रीघाट तक चल रहे सड़क निर्माण का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि नेहरू चौक से गोलबाजार, जूना बिलासपुर, दयालबंद और आगे तक सड़क निर्माण के दौरान कई स्थानों पर फुटपाथ को सड़क का हिस्सा बना दिया गया।
सड़क पर चलने को मजबूर पैदल यात्री
याचिका के अनुसार, जिन स्थानों पर फुटपाथ होना चाहिए, वहां अब सड़क का हिस्सा दिखाई देता है। ऐसे में पैदल यात्रियों को वाहनों के बीच सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के तहत नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि फुटपाथों को सुरक्षित रखना और उन्हें अतिक्रमण से मुक्त करना नगर निगम की जिम्मेदारी है। डिवीजन बेंच ने निगम आयुक्त से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में जमीन पर अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
प्रशासन ने गिनाईं कार्रवाई
सुनवाई के दौरान नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि अतिक्रमण हटाने, मल्टीलेवल पार्किंग और सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
ट्रैफिक पुलिस की ओर से बताया गया कि 2024 में यातायात नियमों के उल्लंघन पर 67 हजार से अधिक चालान किए गए।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने हाल के फोटो और मीडिया रिपोर्ट्स अदालत के सामने पेश कर इन दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में कार्रवाई का दावा है, लेकिन जमीन पर स्थिति अब भी नहीं बदली है।
अब निगम आयुक्त को देना होगा जवाब
याचिकाकर्ता के मुताबिक, शहर के कई फुटपाथों पर अभी भी दुकानों का कब्जा है और जगह-जगह वाहन खड़े किए जाते हैं। इसके साथ ही शहर की पार्किंग व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी नीति के अभाव का भी आरोप लगाया गया है।
अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम आयुक्त को शपथपत्र के जरिए बताना होगा कि फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त रखने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए वास्तव में क्या कदम उठाए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी। कोर्ट के अगले रुख पर बिलासपुर की फुटपाथ और पार्किंग व्यवस्था को लेकर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।





