नई दिल्ली

Nautapa : 25 मई से शुरू 2 जून तक चलेगा नौतपा…! 48°C तक पहुंचेगा तापमान…IMD ने दी चेतावनी

नौतपा के 9 दिनों गर्मी रहेगी चरम पर

नई दिल्ली, 19 मई। Nautapa : इस साल, ‘नौतपा’ का समय 25 मई से 2 जून तक रहेगा। इस दौरान, चूंकि सूर्य सीधे कर्क रेखा के ऊपर स्थित होता है, इसलिए मौसम में भीषण गर्मी और उमस देखने को मिलती है। सूखी ज़मीन, झुलसा देने वाली गर्म हवाओं (लू) और बढ़ती नमी के कारण तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुँच जाता है। उत्तर भारत में हर साल मई के आखिरी और जून के शुरुआती दिनों में पड़ने वाली भीषण गर्मी को /नौतपा’ कहा जाता है। इस दौरान सूरज मानो आग बरसाता है। सड़कें तवे की तरह तपने लगती हैं और रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलती। मौसम विभाग भी इन दिनों हीटवेव अलर्ट जारी करता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर नौतपा क्यों पड़ता है और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है?

क्या होता है नौतपा?

‘नौतपा’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘नव’ और ‘तप’ से बना है, जिसका अर्थ है, नौ दिनों की तपिश। आमतौर पर यह दौर 25 मई से 2 जून के बीच माना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई देता है। इन दिनों तापमान 42 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

नौतपा के पीछे क्या है वैज्ञानिक कारण?

वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी 23.5 डिग्री झुकी हुई है। मई के अंत में सूर्य कर्क रेखा के करीब पहुंच जाता है। इस दौरान उत्तरी गोलार्ध पर सूरज की किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं। यही वजह है कि भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। दिन लंबे हो जाते हैं और सूरज देर तक चमकता है। जमीन पूरे दिन गर्मी सोखती रहती है और रात में धीरे-धीरे छोड़ती है। इसी कारण रात का तापमान भी 30-35 डिग्री सेल्सियस तक बना रहता है।

क्यों चलती है लू?

राजस्थान और पश्चिमी रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म और सूखी पछुआ हवाएं उत्तर भारत में लू का रूप ले लेती हैं। सूखी जमीन तेजी से गर्म होती है, जिससे वातावरण और ज्यादा तपने लगता है। ऊपर से बादल नहीं बनने के कारण बारिश की संभावना भी कम हो जाती है।

नौतपा में उमस क्यों बढ़ती है?

नौतपा के दौरान मानसून की तैयारी शुरू हो जाती है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी भरी हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ती हैं। इससे हवा में नमी बढ़ जाती है लेकिन बारिश नहीं होती। यही वजह है कि पसीना सूख नहीं पाता और गर्मी ज्यादा महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार 45°C तापमान और 60-70% ह्यूमेडिटी के दौरान शरीर को 50-55°C जैसी गर्मी महसूस हो सकती है। इसे ही ‘हीट इंडेक्स’ कहा जाता है।

कब मिलेगी राहत?

नौतपा खत्म होने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल (Nautapa) पहुंचता है और धीरे-धीरे पूरे देश में फैलने लगता है। मानसून की पहली बारिश के साथ तापमान में गिरावट आती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलती है।

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