कोरबा।Police Station Transfer News जिले के पुलिस महकमे में इन दिनों “पोस्टिंग पुराण” पूरे चरम पर है। चार अहम थानों में संभावित फेरबदल की सुगबुगाहट ने लाइन में धूल फांक रहे निरीक्षकों के चेहरे पर ऐसी चमक ला दी है, मानो बरसों बाद सरकारी क्वार्टर में एसी लगने वाला हो। सबसे ज्यादा चर्चा उस कुर्सी की है, जिस पर बैठते ही इंस्पेक्टर साहब का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक “ग्राफ” खुद-ब-खुद ऊपर चढ़ने लगता है… यानी कुसमुंडा थाना!
सूत्र बताते हैं कि इन दिनों विभागीय गलियारों में “कौन बनेगा कुसमुंडा थानेदार” नामक अदृश्य रियलिटी शो चल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां लाइफलाइन की जगह “लूप लाइन” काम आती है। जिसकी गाड़ी लंबे समय से लाइन में खड़ी थी, अब उसे उम्मीद है कि शायद इस बार सिग्नल ग्रीन हो जाए।
उधर बालको और दीपका भी किसी “सरकारी आईपीएल टीम” से कम नहीं माने जाते। एक तरफ एल्युमिनियम नगरी की चमक-दमक, तो दूसरी ओर कोयला और डीजल की मलाईदार महिमा। ऐसे में कई निरीक्षकों के सपनों में अब थाना नहीं, पूरा “राजस्व रिसॉर्ट” घूमने लगा है।कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी इन दिनों पूजा-पाठ से लेकर “नेटवर्क साधना” तक में जुट गए हैं। कोई पुराने नेताओं की डायरी झाड़ रहा है, तो कोई विभागीय शुभचिंतकों के यहां हाजिरी बढ़ा चुका है। एक साहब तो इतने आश्वस्त बताए जा रहे हैं कि उन्होंने नई कुर्सी के हिसाब से अपने चेंबर का परदा तक पसंद कर लिया है।
हालांकि अभी तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लाइन में दिन गिन रहे कई निरीक्षक अब अचानक प्रेस किए यूनिफॉर्म में दिखने लगे हैं। चाय की टपरी से लेकर ऑफिस के गलियारे तक बस एक ही सवाल तैर रहा है, “इस बार किसको मिलेगा गिफ्ट पैक थाना… और किसकी गाड़ी फिर लूप लाइन में अटक जाएगी?”
फिलहाल आदेश का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि कोरबा पुलिस महकमे में इन दिनों ट्रांसफर नहीं, “भावनाओं का ट्रैफिक” चल रहा है।



