Korba Teacher Promotion Case: B.Ed. की डिग्री पर उठे सवाल, बिना विभागीय अनुमति पढ़ाई का आरोप; जांच की मांग
वरिष्ठता सूची में B.Ed. दर्ज होने पर भी सवाल
कोरबा, 17 अगस्त। Korba Teacher Promotion Case: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया के बीच B.Ed. की डिग्री को लेकर कोरबा जिले में बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने सरकारी सेवा में रहते हुए विभागीय अनुमति के बिना नियमित B.Ed. की पढ़ाई पूरी की और बाद में कार्योत्तर अनुमति लेकर इसी योग्यता का लाभ पदोन्नति में लेने की कोशिश की। अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष और कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला कोरबा के महासचिव ओमप्रकाश बघेल ने मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करीब आधा दर्जन शिक्षकों के B.Ed. से जुड़े प्रकरण संदेह के घेरे में हैं।
24 घंटे में निरस्त हुआ अनुमति आदेश
आरोप के मुताबिक, संबंधित शिक्षकों ने पहले B.Ed. की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद DEO कार्यालय में कार्योत्तर अनुमति के लिए आवेदन किया। इसके आधार पर संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर कार्यालय से अनुमति आदेश जारी हुआ, लेकिन करीब 24 घंटे के भीतर ही आदेश निरस्त कर दिया गया। बघेल का सवाल है कि यदि अनुमति नियमों के अनुरूप नहीं थी, तो आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की पूरी जांच जरूरी है।
B.Ed. की डिग्री और उपस्थिति रिकॉर्ड की हो जांच
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित शिक्षकों की B.Ed. अंकसूची और डिग्री का संबंधित विश्वविद्यालय से सत्यापन कराया जाए।इसके साथ ही जांच में, सेवा अवधि की उपस्थिति पंजी। अवकाश के रिकॉर्ड। वेतन आहरण विवरण। विभागीय अनुमति से जुड़े दस्तावेज। विश्वविद्यालय की परीक्षा समय-सारणी। परीक्षा अवधि की उपस्थिति का आपस में मिलान किया जाए।
वरिष्ठता सूची में B.Ed. दर्ज होने पर भी सवाल
मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू 1 अप्रैल 2026 की प्राविधिक वरिष्ठता सूची बताया जा रहा है। बघेल के अनुसार, कार्योत्तर अनुमति निरस्त होने के बावजूद कुछ शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता में B.Ed. दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब B.Ed. के लिए जारी कार्योत्तर अनुमति ही निरस्त कर दी गई, तो फिर वरिष्ठता सूची में इस योग्यता को किस आधार पर शामिल किया गया?
नौकरी के दौरान नियमित कोर्स के लिए क्या है नियम?
शिकायतकर्ता के मुताबिक, सरकारी सेवा में रहते हुए नियमित पाठ्यक्रम करने के लिए संबंधित विभाग से अनुमति लेना आवश्यक होता है। नियमित पाठ्यक्रम के लिए नियमानुसार अध्ययन अवकाश आदि की आवश्यकता भी हो सकती है। इसी आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि यदि संबंधित शिक्षक उस अवधि में नियमित रूप से सरकारी ड्यूटी कर रहे थे, तो उन्होंने नियमित B.Ed. का पाठ्यक्रम किस प्रकार पूरा किया।
B.Ed. डिग्री की वैधता पर भी सवाल
शिकायत में बालाघाट स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय से संबंधित B.Ed. डिग्री को लेकर भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि डिग्री में नियमित अध्ययन का उल्लेख है, जबकि संबंधित शिक्षक उसी अवधि में सरकारी सेवा में नियमित रूप से कार्यरत थे। हालांकि, डिग्री फर्जी है या मान्य, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच और विश्वविद्यालय से आधिकारिक सत्यापन के बाद ही निकलेगा।
पूरे प्रदेश में जांच की मांग
ओमप्रकाश बघेल ने मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, विभागीय सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित B.Ed. योग्यता के आधार पर किसी भी शिक्षक को पदोन्नति का लाभ न दिया जाए और यदि दस्तावेजों में गलत जानकारी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल मामला आरोपों और शिकायतों के स्तर पर है। B.Ed. डिग्री, विभागीय अनुमति और वरिष्ठता सूची से जुड़े दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।















