
कोरबा। Korba Ash Rainstormऔद्योगिक नगरी कोरबा में आज मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। दोपहर बाद चली तेज अंधड़ ने जहां लोगों को गर्मी से राहत की उम्मीद जगाई थी, वहीं इस आंधी ने शहर को ‘राखड़ के गुबार’ में तब्दील कर दिया है। स्थिति यह है कि सड़कों पर दृश्यता (Visibility) कम हो गई है और आसमान से बारिश की बूंदों के बजाय राखड़ (Fly Ash) बरस रही है।

आसमान में छाया राखड़ का काला साया
तेज हवाओं के चलते राखड़ बांधों (Ash Dykes) से उड़ने वाली राख अब रिहायशी इलाकों में घुस चुकी है। दर्री, बालको, और कुसमुंडा जैसे क्षेत्रों में स्थिति बेहद गंभीर है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़कों पर चलना दूभर हो गया है, क्योंकि आंखों में राख पड़ने से दुर्घटनाओं का अंदेशा बढ़ गया है।
विकास की चमक पर ‘राखड़’ की मार
एक तरफ प्रशासन शहर के सौंदर्यीकरण और ‘स्मार्ट’ होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर एक तेज आंधी निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दावों की पोल खोल देती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि:
“जैसे ही तेज हवा चलती है, हमारे घरों के भीतर राख की परत जम जाती है। यह केवल धूल नहीं, बल्कि बीमारियों का न्योता है।”
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘राखड़ वर्षा’ दमा, एलर्जी और आंखों के संक्रमण के मरीजों के लिए बेहद घातक है। प्रदूषण विभाग की लापरवाही के कारण राखड़ बांधों पर पानी का छिड़काव न होना इस समस्या का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
प्रभावित इलाके: दर्री, जमनीपाली, बालको, मानिकपुर और कुसमुंडा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित।
यातायात बाधित: सड़कों पर राख के गुबार के कारण गाड़ियों की रफ्तार थमी।
पर्यावरण विभाग की चुप्पी: लगातार हो रही राखड़ की उड़ान पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।



