Korba Breaking: राख ट्रांसपोर्टरों का चमत्कारी ‘टाइम ट्रैवल’! डेढ़ घंटे में पशुपतिनाथ की राखड़ पहुंची बिलासपुर के भनसर
गाड़ी नंबर CG12S2487 और CG12 6977 का लाइव 'खेल' उजागर: झाबू डैम से भनसर के लिए निकलीं गाड़ियाँ रास्ते के 'घनरास गाँव' में ही खाली; अधिकारियों का मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह फेल!

कोरबा।Korba Ash Transport Scam विज्ञान, भूगोल और सरकारी नियमों के सारे दावे उस वक्त धरे के धरे रह गए, जब कोरबा के राख ट्रांसपोर्टरों ने अपनी ‘सुपरफास्ट’ तकनीक से एक नया रिकॉर्ड बना डाला। जिले में राख से अवैध रकम बनाने का एक ऐसा अनोखा, जादुई और खुलेआम चलने वाला खेल साक्ष्यों के साथ सामने आया है, जिसे सुनकर खुद प्रशासन भी अपना सिर पीट लेगा। कागजों पर ‘पशुपतिनाथ’ के नाम से लोड हुई राखड़ महज डेढ़ घंटे के भीतर बिलासपुर के ‘भनसर’ पहुंच भी गई और गाड़ी वापस लोड होने के लिए दर्री साइलो के गेट पर आकर खड़ी भी हो गई!
यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा करोड़ों रुपये का संगठित राखड़ घोटाला है, जिसका जीवंत उदाहरण आज सड़कों पर देखने को मिला।
क्या है पूरा ‘चमत्कारी’ मामला और लाइव गाड़ियों का खेल?
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, खेल की शुरुआत झाबू राखड़ डैम से होती है। यहाँ से ट्रेलरों में नियमतः राखड़ लोड किया जाता है। कागजी दस्तावेजों और जीपीएस (GPS) को ठेंगा दिखाने के लिए ऑन-रिकॉर्ड गंतव्य बिलासपुर का भनसर तय किया जाता है।
इस काले खेल का लाइव सबूत देखिए—शाम 4:00 से 4:30 बजे के बीच गाड़ी नंबर CG12S2487 और CG12 6977 झाबू डैम से बिलासपुर के भानेसर के लिए रवाना की जाती हैं। कोरबा से बिलासपुर भनसर की दूरी तय करने, गाड़ी खाली करने और वापस आने में कम से कम 5 से 6 घंटे का समय लगना अनिवार्य है।
लेकिन यहाँ का गणित एकदम निराला है! ये गाड़ियाँ बिलासपुर गईं ही नहीं, बल्कि ठीक डेढ़ घंटे बाद पास के ही ‘घनरास गाँव’ में अवैध रूप से पूरी राखड़ को खुलेआम पटक (खाली कर) देती हैं। राख का अवैध डंपिंग खेल खत्म करते ही ये गाड़ियाँ हवा की रफ्तार से वापस लौटकर HTTP साइलो गेट (दर्री साइलो) पर अगली ट्रिप मारने के लिए बकायदा कतार में खड़ी हो जाती हैं!
इस ‘शॉर्टकट’ खेल के 5 बड़े कड़वे सच:
01. झाबू डैम से उठी राख, घनरास में साफ: झाबू राखड़ डैम से पर्यावरण को बचाने के नाम पर राखड़ उठाई तो जा रही है, लेकिन वह बिलासपुर के भनसर पहुँचने के बजाय रास्ते के गांवों (जैसे घनरास) में ही अवैध रूप से डंप हो रही है।
02. नंबरों के साथ फर्जीवाड़ा उजागर: गाड़ी नंबर CG12S2487 और CG12 6977 जैसी गाड़ियों का ऑन-रिकॉर्ड समय और वास्तविक लोकेशन सीधे तौर पर फर्जी एंट्री और बड़े सिंडिकेट की गवाही दे रहा है।
03. राख से रकम बनाने की अंधी दौड़: पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाकर ट्रांसपोर्टर और बिचौलिए हर ट्रिप के साथ सरकार और कंपनियों को करोड़ों की चपत लगा रहे हैं।
04. अफसरों का ‘हाईटेक’ मॉनिटरिंग सिस्टम फेल: लाखों-करोड़ों खर्च कर जो जीपीएस और ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम बनाया गया था, वह इन चिन्हित गाड़ियों के लाइव खेल के आगे पूरी तरह नतमस्तक और फेल साबित हो चुका है।
05. सरकार को लग रहा है तगड़ा चूना: फ्लाई ऐश यूटिलाइजेशन के नाम पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी और राशि को यह संगठित गिरोह आपस में मिलकर डकार रहा है।
अंधेरे में तीर चला रहा पर्यावरण विभाग और प्रशासन
Korba Ash Transport Scam शहर का प्रबुद्ध वर्ग अब नंबरों के खुलासे के बाद खुलकर सवाल उठा रहा है कि जब गाड़ियाँ घनरास गाँव में खाली होकर इतनी जल्दी साइलो गेट पर वापस आ रही हैं, तो क्या पर्यावरण विभाग के अफसरों की आँखों पर पट्टी बंधी है? क्या किसी को इन गाड़ियों के लॉग-बुक और समय के इस भारी हेरफेर की भनक नहीं है? या फिर इस मलाईदार खेल में ‘मौन सहमति’ का हिस्सा ऊपर तक जा रहा है?
“यह केवल परिवहन का उल्लंघन नहीं, बल्कि एक संगठित वित्तीय और पर्यावरणीय अपराध है। यदि साक्ष्यों के साथ गाड़ियाँ डेढ़ घंटे में ट्रिप मारकर साइलो गेट पर लौट रही हैं, तो साफ है कि जीपीएस ट्रैकिंग के साथ छेड़छाड़ की जा रही है और स्थानीय स्तर पर ही राख डंप कर पर्यावरण को तबाह किया जा रहा है।”
अब देखना है, इन गाड़ियों पर कब गिरेगी गाज?
कलेक्टर कुणाल दुदावत के कड़े तेवरों के बीच अब देखना यह होगा कि खनिज और पर्यावरण विभाग की टीम गाड़ी नंबर CG12S2487 और CG12 6977 समेत इस पूरे ‘राखड़ एक्सप्रेस’ माफिया के खिलाफ कब और कैसी दंडात्मक कार्रवाई करती है, या फिर यह चमत्कारी और गैरकानूनी सफर इसी तरह बेखौफ जारी रहेगा!



