रायपुर

Chhattisgarh Assembly : दिव्यांग महाविद्यालयों की दुर्दशा पर गरमाया मुद्दा…! अजय चंद्राकर ने सरकार को घेरा

राज्य में 31 में से 30 दिव्यांग महाविद्यालयों में प्राचार्य का पद रिक्त

रायपुर, 18 जुलाई। Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को दिव्यांगजनों के लिए स्थापित महाविद्यालयों की दुर्दशा और अव्यवस्था को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। विधायक अजय चंद्राकर ने दिव्यांग शिक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि ये कॉलेज या तो बंद कर दिए जाएं या फिर ठीक से संचालित किए जाएं, क्योंकि जो हालात हैं, वह दिव्यांगों के साथ एक मजाक से कम नहीं हैं।

चंद्राकर ने कहा कि राज्य में 31 में से 30 दिव्यांग महाविद्यालयों में प्राचार्य का पद रिक्त है। अनुदान की राशि हर साल कम होती जा रही है, जिससे संस्थानों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को संबोधित करते हुए कहा, आपके कार्यकाल में दिव्यांगजनों के लिए अच्छी पहल की गई थी, लेकिन आज वही संस्थान उपेक्षा का शिकार हैं।”

विधायक के सवालों की प्रमुख बातें 

  • रायपुर स्थित शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय में स्वीकृत सेटअप क्या है?
  • कौन-कौन से पद रिक्त व भरे हुए हैं?
  • कौन-कौन से विषय पढ़ाए जा रहे हैं और कितने दिव्यांग छात्र अध्ययनरत हैं?
  • छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं दी जा रही हैं?
  • वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक कितनी राशि स्वीकृत और व्यय हुई?

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का जवाब:

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि रायपुर स्थित शासकीय दिव्यांग महाविद्यालय में फिलहाल दो विषयों में पढ़ाई चल रही है:

  1. बी.एफ.ए. (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) – मुख्य विषय: चित्रकला
  • 130 दिव्यांग छात्र-छात्राएं वर्तमान में अध्ययनरत हैं।
  • छात्रों को मिल रही सुविधाओं व बजट व्यय की जानकारी उन्होंने संलग्न प्रपत्रों ‘ब’, ‘स’, ‘द’ व ‘इ’ में दी।
  • शिक्षकों के 112 पदों पर भर्ती की स्वीकृति मिल चुकी है, और जल्द ही प्राचार्य नियुक्त किए जाएंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का हस्तक्षेप

जब मंत्री राजवाड़े ने पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, तो डॉ. रमन सिंह ने स्पष्ट कहा, आपको मंत्री पद संभाले डेढ़ साल हो चुके हैं, पिछली सरकार की गलतियां मत गिनाइए, बताइए आपने क्या किया है?” प्लेसमेंट कंपनियों पर भी सवाल

चंद्राकर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि चित्रकला, तबला वादन जैसे विषयों के लिए छत्तीसगढ़ में कोई प्लेसमेंट कंपनी है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने यह सवाल उठाकर सरकार के ‘रोजगार दिलाने’ के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

विधानसभा की यह बहस दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए विशेष महाविद्यालयों की स्थिति पर सवालिया निशान छोड़ गई है। एक ओर जहां सरकार भर्ती और सुविधाएं बढ़ाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे दिव्यांगों के साथ धोखा बता रहा है।

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