Power Plant Blast : कंट्रोल रूम का तापमान 60°C तक पहुंचा, फिर टर्बाइन में जोरदार ब्लास्ट, 3 इंजीनियरों की मौत, एक गंभीर
Power Plant Blast :
रामगढ़/रांची, 21 अगस्त। Power Plant Blast : एक कंट्रोल रूम, बढ़ता तापमान और फिर टर्बाइन में खौफनाक धमाका… झारखंड के रामगढ़ जिले में शनिवार को पावर प्लांट में हुए हादसे ने हड़कंप मचा दिया। बरकाकाना थाना क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात के पावर प्लांट में टर्बाइन ब्लास्ट की घटना में तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल है। घायल को बेहतर इलाज के लिए रांची भेजे जाने की सूचना है। हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और प्लांट प्रबंधन की टीम घटना के तकनीकी कारणों की जांच में जुटी है।
ओवरहीटिंग के बाद फेल हुआ सिस्टम, फिर टर्बाइन में ब्लास्ट
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसे से पहले पावर प्लांट के कंट्रोल रूम में तापमान काफी बढ़ गया था। इसके बाद सिस्टम फेल होने और टर्बाइन के ओवरस्पीड होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि इसी दौरान टर्बाइन में जोरदार विस्फोट हुआ और उसकी चपेट में प्लांट में काम कर रहे इंजीनियर और कर्मचारी आ गए। बरकाकाना थाना प्रभारी उमाशंकर वर्मा ने बताया कि हादसे में तीन कर्मियों की मौत हुई है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हुआ है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
तीन इंजीनियरों की मौत, एक की हालत गंभीर
हादसे में जिन तीन इंजीनियरों की मौत की सूचना है, उनकी पहचान:
- विनीत महतो — जागेश्वर विहार, बोकारो
- संजीव केसरी — धनबाद
- अभिषेक पांडेय — नगर उंटारी, गढ़वा
वहीं तरुण रवानी, निवासी हजारीबाग, गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। उन्हें बेहतर उपचार के लिए रांची भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
कर्मचारियों का दावा- कई दिनों से बढ़ रहा था कंट्रोल रूम का तापमान
हादसे के बाद प्लांट कर्मचारियों ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कंट्रोल रूम का तापमान पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ रहा था और वहां लगा एसी करीब एक महीने से खराब था। कर्मचारियों के मुताबिक, इसकी जानकारी प्रबंधन को दी गई थी, लेकिन कूलिंग सिस्टम को समय रहते दुरुस्त नहीं कराया गया।
इतना ही नहीं, कर्मचारियों का दावा है कि कंट्रोल रूम के तापमान की नियमित रूप से टेम्परेचर गन से निगरानी की जाती थी और इसकी रीडिंग भी प्रबंधन तक पहुंचाई जाती थी।
30 नहीं… 50 से 60 डिग्री तक पहुंच रहा था तापमान!
एक कर्मचारी के अनुसार, कंट्रोल रूम का सामान्य तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, लेकिन हादसे से पहले तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि कूलिंग के लिए कूलर की व्यवस्था की गई थी, जबकि इतनी अधिक गर्मी में एसी की जरूरत थी।
आरोप है कि अत्यधिक तापमान के कारण पावर प्लांट के पैनल और सिस्टम प्रभावित हुए। इसके बाद प्रोटेक्शन सिस्टम के अपेक्षित तरीके से काम नहीं करने और टर्बाइन के ओवरस्पीड होने से स्थिति गंभीर हो गई।
क्या इमरजेंसी सिस्टम ने भी दे दिया था जवाब?
हादसे के पीछे तकनीकी गड़बड़ी के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कर्मचारियों का दावा है कि आपात स्थिति में काम आने वाला सिस्टम भी अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर सका और इसी दौरान टर्बाइन में विस्फोट हो गया। हालांकि, हादसे का वास्तविक तकनीकी कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप, जांच की मांग
घटना के बाद कर्मचारियों में आक्रोश है। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष जांच, मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और घायल इंजीनियर को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग की है।
अब जांच में यह अहम होगा कि —
- कंट्रोल रूम की कूलिंग व्यवस्था कब से खराब थी?
- तापमान बढ़ने की शिकायतें प्रबंधन तक कब-कब पहुंचीं?
- उपकरणों का मेंटेनेंस समय पर हुआ था या नहीं?
- प्रोटेक्शन और इमरजेंसी सिस्टम ने हादसे के वक्त कैसे काम किया?
- सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं?
फिलहाल पुलिस और प्लांट प्रबंधन हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।















