
दर्री-जमनीपाली। Mission2028 छत्तीसगढ़ में 2028 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियों ने भले ही अभी से रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी हो, लेकिन कांग्रेस ने संगठन को जमीन पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। दर्री एचटीपीपी के इरेक्टर हॉस्टल में दर्री ब्लॉक एवं मंडल कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों की बैठक में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का मंत्र दिया।

बैठक में मिशन 2028 की तैयारियों की झलक साफ दिखाई दी। जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि ब्लॉक, मंडल और जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि आज की मेहनत का असर आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों पर साफ दिखाई देगा।
उन्होंने संगठन की असली ताकत बूथ स्तर को बताते हुए कहा कि जिला, ब्लॉक, मंडल और वार्ड कमेटियों के साथ बूथ कमेटियों को भी सक्रिय और मजबूत किया जाए। उनका कहना था कि चुनावी मैदान में संगठन जितना मजबूत होगा, कांग्रेस को उतना ही राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
बैठक में बिजली के बढ़े दाम और स्मार्ट मीटर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कांग्रेस नेताओं ने सरकार से बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी वापस लेने और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना फिर शुरू करने की मांग की।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने बिजली दरों में पांच बार हुई बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की। वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष नत्थू लाल यादव ने स्मार्ट मीटर से अधिक बिल आने की शिकायतों की जांच कर अंतर की राशि वापस करने तथा पुराने मीटर बहाल करने की मांग रखी।
ब्लॉक अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी ने नई कार्यकारिणी को वार्ड और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करने की बात कही।
बैठक में कांग्रेस के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन विस्तार, स्थानीय मुद्दों और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर सुझाव दिए। बड़ी संख्या में ब्लॉक एवं मंडल पदाधिकारियों की मौजूदगी ने संकेत दिया कि कांग्रेस अब मिशन 2028 को लेकर संगठन को सक्रिय करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो बैठक महज संगठनात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और बूथ स्तर की मजबूती जैसे मुद्दों के जरिए कांग्रेस ने साफ संकेत दिया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में स्थानीय जनसमस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाने और संगठन को बूथ तक पहुंचाने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।
अब देखना होगा कि दर्री-जमनीपाली से शुरू हुई यह संगठनात्मक कवायद 2028 के विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस के लिए कितनी जमीन तैयार करती है।















