
Korba News कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक 10 के बरबसपुर में प्रस्तावित शराब दुकान खोलने का फैसला आखिरकार निरस्त हो गया। ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के विरोध और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के हस्तक्षेप के बाद आबकारी विभाग ने प्रस्तावित दुकान को खोलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
बरबसपुर में नई शराब दुकान खोले जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों और महिलाओं में नाराजगी फैल गई थी। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से समर्थन मांगा था। ग्रामीणों की मांग पर अग्रवाल स्वयं बरबसपुर पहुंचे और लोगों से मुलाकात कर उनकी बात सुनी।
उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि जहां ग्रामीणों की इच्छा नहीं होगी, वहां शराब दुकान खोलने नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि वे हर परिस्थिति में ग्रामीणों के साथ खड़े रहेंगे।
ग्रामीणों के विरोध को गंभीरता से लेते हुए जयसिंह अग्रवाल ने मौके से ही कोरबा जिले के आबकारी अधिकारी से दूरभाष पर चर्चा की और बरबसपुर में शराब दुकान खोलने के प्रस्ताव को तत्काल रोकने तथा ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करने की बात कही।
इसके बाद आबकारी विभाग ने बरबसपुर में शराब दुकान खोलने के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। प्रस्ताव रद्द होने की खबर सामने आते ही ग्रामीण महिलाओं में खुशी का माहौल देखने को मिला।
50-60 महिलाओं ने पहुंचकर जताया आभार
प्रस्ताव निरस्त होने के बाद बरबसपुर की करीब 50 से 60 महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के निवास पहुंचा। महिलाओं ने उनका आभार जताते हुए कहा कि ग्रामीणों की आवाज को मजबूती से उठाने और उनके साथ खड़े होने के कारण ही उनकी मांग को गंभीरता से लिया गया।
इस दौरान जयसिंह अग्रवाल ने महिलाओं और ग्रामीणों का आभार स्वीकार करते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि ग्रामीणों की एकजुटता और उनकी भावना की जीत है।
उन्होंने कहा कि वे हमेशा जनता और ग्रामीणों के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी जहां जरूरत होगी, वहां उनके अधिकार और हितों के लिए मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे।
महिलाओं की एकजुटता बनी मिसाल
जयसिंह अग्रवाल ने बरबसपुर की महिलाओं की दृढ़ता और एकजुटता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सामाजिक हित से जुड़े मामलों में जनता की इच्छा और भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बरबसपुर में प्रस्तावित शराब दुकान का रद्द होना फिलहाल ग्रामीणों की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर महिलाओं के नेतृत्व में हुए विरोध ने यह संदेश दिया है कि स्थानीय समुदाय यदि किसी फैसले के खिलाफ संगठित होकर अपनी बात मजबूती से रखे, तो प्रशासन के स्तर पर उसकी आवाज को गंभीरता से लिया जा सकता है।















