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pakistan saudi turkiye joint defence agreement: सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के डिफेंस पैक्ट, सामाने आई भारत की पहली प्रतिक्रिया

pakistan saudi turkiye joint defence agreement: नई दिल्ली। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में आयोजित संयुक्त रक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान एक संयुक्त रक्षा समझौते (Joint Defense Pact) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत तीनों देशों ने सहमति जताई है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और सामूहिक रूप से उसका जवाब दिया जाएगा।

समझौते पर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। तीनों देशों ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और किसी भी बाहरी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक रक्षा तंत्र विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी अहमियत

यह रक्षा समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। माना जा रहा है कि क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात और सैन्य गतिविधियों को देखते हुए तीनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को औपचारिक रूप दिया है।

भारत ने कहा- हालात पर रखी जा रही नजर

इस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार पूरे मामले पर करीबी नजर रखे हुए है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम है और भारत इससे जुड़े सभी पहलुओं की लगातार निगरानी कर रहा है।

कई महीनों से चल रही थी तैयारी

विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक गठबंधन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी। पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान तनाव कम करने की दिशा में मध्यस्थता की कोशिश की थी, जबकि तुर्की गाजा संकट के समाधान के लिए लगातार कूटनीतिक पहल करता रहा है। सऊदी अरब और पाकिस्तान पहले भी वर्ष 2025 में रक्षा सहयोग बढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं।

बदल सकते हैं क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण

पाकिस्तान मुस्लिम देशों में एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है। ऐसे में तुर्की के इस रक्षा गठबंधन में शामिल होने से पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सामरिक तथा राजनीतिक स्थिति पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले समय में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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