Bilaspur High Court : LB संवर्ग शिक्षकों को हाईकोर्ट से झटका…! ‘पुराने आदेश’ के आधार पर समान लाभ देने से इनकार…शिक्षकों की अपील खारिज

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Chhattisgarh High Court

बिलासपुर, 16 जुलाई।Bilaspur High Court : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एलबी संवर्ग के शिक्षकों को समान लाभ देने की मांग वाली अपील खारिज करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिर्फ किसी पुराने न्यायिक फैसले या विभागीय परिपत्र का हवाला देने से समान लाभ का अधिकार नहीं बनता। संबंधित कर्मचारी को यह भी साबित करना होगा कि उसके सेवा संबंधी तथ्य और परिस्थितियां पुराने मामले से पूरी तरह मेल खाती हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। यह मामला रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड में पदस्थ प्रधान पाठिका हेमलता बघेल तथा शिक्षिकाओं गीता साहू, मीरा साहू और मंजूषा जायसवाल से जुड़ा है। पहले उनकी याचिका एकलपीठ ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने 109 दिन की देरी से खंडपीठ में अपील दायर की। अदालत ने देरी को माफ कर सुनवाई की, लेकिन मामले के गुण-दोष के आधार पर राहत देने से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं ने 10 मार्च 2017 के विभागीय परिपत्र और सोना साहू प्रकरण का हवाला देते हुए समान लाभ की मांग की। वहीं राज्य सरकार ने तर्क दिया कि इस विवाद का समाधान पहले ही पुष्पलता माणिकपुरी मामले में किया जा चुका है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उनकी सेवा शर्तें और परिस्थितियां सोना साहू मामले के समान हैं। इसलिए केवल पुराने फैसले या विभागीय आदेश का हवाला देकर समान लाभ नहीं दिया जा सकता।अदालत की इस टिप्पणी को भविष्य में समान लाभ से जुड़े सेवा मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत माना जा रहा है।

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