Housing Board : हाउसिंग बोर्ड की बिल्डिंग पर कब्जे की कोशिश…! आधा भवन गिराने के बाद मचा बवाल…प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर
आरोपी पर FIR दर्ज
बिलासपुर, 06 जून। Housing Board : बिलासपुर के नेहरू नगर में सरकारी सामुदायिक भवन को निजी पैतृक संपत्ति बताकर ढहाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी ने कोर्ट में भवन को अपना 80 साल पुराना मकान बताकर आवेदन दिया, जिसके बाद बिना मालिकाना दस्तावेजों की जांच किए भवन तोड़ने का आदेश जारी कर दिया गया।
जब तक प्रशासन और स्थानीय लोगों को सच्चाई पता चली, तब तक भवन का आधे से ज्यादा हिस्सा गिराया जा चुका था। अब आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, कुदुदंड निवासी मोहम्मद अली ने हाउसिंग बोर्ड के सामुदायिक भवन को अपना निजी मकान बताते हुए उसे जर्जर घोषित कर ढहाने के लिए आवेदन लगाया था।
मामले की सुनवाई करते हुए रजनी भगत ने तहसीलदार और पटवारी से जांच रिपोर्ट मांगी। राजस्व अमले ने अपनी रिपोर्ट में भवन को जर्जर और असामाजिक तत्वों का अड्डा बताया, लेकिन भवन के मालिकाना हक के दस्तावेजों की जांच नहीं की। इसी अधूरी रिपोर्ट के आधार पर बीएनएस की धारा 152 के तहत भवन तोड़ने का सशर्त आदेश जारी कर दिया गया।
आधा भवन ढहने के बाद खुली सच्चाई
मजिस्ट्रेट का आदेश मिलते ही आरोपी ने सरकारी सामुदायिक भवन में तेजी से तोड़फोड़ शुरू कर दी। भवन का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ढहा दिया गया और खिड़की-दरवाजे तक निकाल लिए गए। इसी दौरान वार्ड पार्षद Kartik Yadav की नजर इस पर पड़ी। उन्होंने तुरंत हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही गृह निर्माण मंडल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और तोड़फोड़ रुकवाई, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।
धोखाधड़ी और सरकारी संपत्ति नुकसान का मामला
हाउसिंग बोर्ड के निर्देश पर सब-इंजीनियर सनी घोरे ने सिविल लाइन थाने में आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और धोखाधड़ी की FIR दर्ज कराई है।
कोर्ट में क्या दावा किया था आरोपी ने?
आरोपी ने आवेदन में दावा किया था कि कुदुदंड स्थित खसरा नंबर 362/73 की जमीन पर उसका करीब 80 साल पुराना मकान है, जो जर्जर हो चुका है और कभी भी गिर सकता है। इसी आधार पर भवन गिराने की अनुमति मांगी गई थी।
मामले में आदेश जारी करने वाली सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत (Housing Board) पहले भी विवादों में रह चुकी हैं। अधिवक्ता संघ ने उन पर पहले गंभीर आरोप लगाए थे। वकीलों का आरोप था कि प्रतिबंधात्मक धाराओं में जमानत देने के बदले रिश्वत मांगी जाती थी। इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन भी किया था।




