
कोरबा/छत्तीसगढ़। जिले में फ्लाई ऐश (राख) परिवहन और डंपिंग को लेकर बड़ा खेल सामने आ रहा है। आरोप है कि NTPC से निकलने वाली राख को जिन स्थानों के लिए अनुमति दी गई है, वहां न ले जाकर दूसरी जगहों पर खुलेआम डंप किया जा रहा है। इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाई ऐश से उड़ने वाली धूल के कारण आसपास के इलाकों में सांस संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। बावजूद इसके कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं नजर आ रही हैं।
‘राख से रकम’ बनाने का खेल?
सूत्रों के मुताबिक NTPC और CSEB के फ्लाई ऐश यूटिलाइजेशन से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है। कागजों में पर्यावरण मानकों का पालन दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीन पर हालात अलग नजर आते हैं।
आरोप यह भी है कि फ्लाई ऐश को तय और सुरक्षित स्थलों पर डिस्पोज करने के बजाय सरकारी जमीनों और कुछ ईंट भट्टों के आसपास डंप किया जा रहा है। इससे पर्यावरणीय नुकसान के साथ स्थानीय आबादी भी प्रभावित हो रही है।
पर्यावरण अधिकारी की चुप्पी पर सवाल
मामले में पर्यावरण अधिकारी प्रसन्ना सोनकर की भूमिका और चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लगातार शिकायतों और राख प्रदूषण के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।लोगों का सवाल है कि जब पूरे इलाके में राख से प्रदूषण फैल रहा है तो जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
पशुपति नाथ ट्रांसपोर्ट कंपनी पर आरोप
फ्लाई ऐश परिवहन में लगी पशुपति नाथ ट्रांसपोर्ट कंपनी पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि कंपनी की गाड़ियां तय स्थानों के बजाय अन्य जगहों पर राख खाली कर रही हैं। रात-दिन चल रहे इस परिवहन से सड़क किनारे के गांवों और बस्तियों में धूल का गुबार बना रहता है।
कार्रवाई या सिर्फ फाइलों का खेल?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरा मामला खुलेआम सामने है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या जनआंदोलन का इंतजार कर रहा है?अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में जांच और कार्रवाई होती है या फिर “राख से रकम” का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।



