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Korba : निगम में ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का खेल: टेंडर से पहले तय हो रहे ठेकेदार!

Korba Nagar Nigam Tender Scam शहर की सरकार बदली तो लगा था कि अब निगम के दफ्तरों से भ्रष्टाचार की धूल झाड़ दी जाएगी। मगर हुआ वही, जो हर बार होता है,दीवारों पर नया पेंट चढ़ा, लेकिन अंदर की सीलन जस की तस रही। व्यवस्था “शहर की सरकार” क्या बदली, व्यवस्था के सूरमाओं ने लूट का व्याकरण ही बदल दिया। कहने को तो व्यवस्था परिवर्तन हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाड़ियों के लिए यह महज ‘पुरानी शराब में नई बोतल’ जैसा है। टेंडर मैनेज करने वाले सिंडिकेट ने नए निजाम में भी सेंध लगा ली है; शतरंज की बिसात वही है, बस मोहरे बदल दिए गए हैं।

 

साकेत से पंचवटी तक ‘त्रिदेव’ का पहरा निगम के गलियारों में चर्चा आम है कि अब साकेत भवन (मुख्यालय) के टेंडरों की पटकथा पंचवटी में बैठकर ‘त्रिदेव’ लिख रहे हैं। ‘अंधा बांटे रेवड़ी, फिर-फिर अपनों को दे’ की तर्ज पर चहेते ठेकेदारों की सूची पहले ही मुकम्मल कर ली गई है। टेंडर की तकनीकी औपचारिकताएं तो महज एक दिखावा हैं, दरअसल लिफाफा उसी का खुलेगा जो इस सिंडिकेट के ‘फिटनेस टेस्ट’ में पास होगा और असल खेल तो वहीं शुरू होता है, जहां “फिटनेस टेस्ट” का मतलब योग्यता नहीं, बल्कि ‘योगदान’ होता है।
नया कॉरिडोर, पुरानी मलाई का एक दौर था जब निगम में टेंडर मैनेज करने की एक खास टीम थी, जो एक निश्चित ‘दक्षिणा’ लेकर सबका बेड़ा पार लगा देती थी। लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है। नया ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनते ही सत्ता का समीकरण ऐसा उलझा है कि मलाई किसी और के हिस्से जा रही है। टेंडर मैनेज के इस बहती गंगा में हाथ धोने से ‘सुलझे हुए पंडित जी’ भी पीछे नहीं हैं। चर्चा है कि पंडित जी अब जोन कार्यालयों की निविदाओं में अपना मंत्र फूंक रहे हैं ताकि काम केवल ‘खास’ यजमानों को ही मिले।लब्बोलुआब निगम में टेंडर की पारदर्शिता अब ‘गूलर का फूल’ हो गई है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के नाम पर भ्रष्टाचार का एक्सप्रेस-वे तैयार हो जाए, तो आम जनता के विकास कार्यों पर सिंडिकेट का ग्रहण लगना तय है।

 

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