
कोरबा। commission dealशहर की राजनीति दो कद्दावर नेता के इर्द गिर्द घूमती है। आरोप प्रत्यारोप तो लगते ही रहते है । इन सब चर्चाओं के बीच विकास और कल्याण को परखने वाले जागरूक नागरिक 17 और 18 पेटी की चर्चा कर रहे है और राजेश खन्ना के गीत ये पब्लिक है जो सब जानती है को गुनगुना रहे है।
दरअसल सरकारी दफ्तरो का अपना अलग सिस्टम है जो सरकारी काम करते है उन्हें सिस्टम फॉलो करना पड़ता है। सिस्टम में कहीं 10 परसेंट कही 20 परसेंट और कहीं जबराना वसूली का रिवाज है। पिछले दिनो निगम के सफाई कार्य के लिए हुए अनुबंध की खबर अंदरखाने से छनकर आई तो उत्सुकतावश एग्रीमेंट के लिए चढ़ावा की भी चर्चा होने लगी।
सूत्रधार की माने तो शहर को साफ रखने से पहले “सिस्टम” को साफ करना पड़ा और इसके लिए कांट्रेक्टरों ने 17 और 18 पेटी का “स्वच्छ योगदान” दिया। किसके हिस्से में 17 पेटी आया और किसे 18 पेटी नजराना पेश किया गया इसकी खोज खुफिया विभाग के दरोगा जी खोज रहे है। उधर निगम का “कमीशन कलेक्शन मंडल” यानी त्रिदेव तनाव में जरूर हैं, लेकिन गिलास हाथ में है और फिलॉसफी भी कमाल की है, “जेब में मनी हो, तो शनि भी कुछ नहीं बिगाड़ते!”



