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Korba News : जुगाड़ टेक्नोलॉजी पर टिका राखड़ बांध: मेंटेनेंस घोटाले से भर चुका सिस्टम, खतरे में हसदेव और कोरबा का भविष्य

कोरबा। Korba Ash Dam Newsछत्तीसगढ़ के पावर हब कोरबा में राखड़ बांधों की हकीकत अब डराने लगी है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) के HTPP प्लांट से जुड़े डिंडोलभांटा और झाबू राखड़ बांधों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां राख रखने की जगह तक नहीं बची। स्थिति संभालने के बजाय जिम्मेदार अफसर जुगाड़ टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर मिट्टी और राख का अस्थायी मेंड बनाकर किसी तरह राख भर रहे हैं।

Korba Ash Dam News सूत्रों के मुताबिक, हर साल इन बांधों से राख निकालने और मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये तक का काम दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। कागजों में सफाई और रखरखाव के दावे, और मौके पर ओवरफ्लो होते बांध… यह साफ इशारा करता है कि कहीं न कहीं बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है। बोगस बिल और फर्जी कार्यों के जरिए करोड़ों के घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालात यह हैं कि किसी भी राखड़ बांध में दो से तीन महीने से ज्यादा की क्षमता नहीं बची है। इसके बावजूद सालों से एक ही अधिकारियों का जमे रहना सवाल खड़े कर रहा है। लंबे समय से एक ही जगह तैनाती ने सिस्टम को कमजोर किया है और भ्रष्टाचार को खुली छूट मिल गई है।

सबसे चिंता की बात यह है कि इन राखड़ बांधों का सीधा असर हसदेव नदी पर पड़ सकता है, जो कोरबा, जांजगीर-चांपा और सक्ती जैसे जिलों के किसानों के लिए जीवनरेखा है। यदि राख और प्रदूषित पानी नदी में मिला, तो खेती-किसानी पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। मवेशियों के लिए भी यह पानी जहर साबित हो सकता है।

यही नहीं, कोरबा शहर में नगर निगम के जरिए सप्लाई होने वाला पानी भी इसी स्रोत से जुड़ा है। ऐसे में अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में इसका असर सीधे आम लोगों की सेहत पर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू हुई गड़बड़ियों पर अब तक लगाम नहीं लग पाई है। उल्टा, हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि आखिर कब जागेंगे, या फिर राखड़ बांधों की यह जुगाड़ व्यवस्था किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है।

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