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Korba: तब सड़क पर आंदोलन, अब सिर्फ अभिनंदन… गड्ढों पर क्यों मौन हैं भाजपा के सुरवीर?

कोरबा। Korba Road Politics कभी शहर की जर्जर सड़कों को लेकर धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और आंदोलन करने वाले भाजपा के नेता आज सत्ता में आने के बाद खामोश नजर आ रहे हैं। जिन सड़कों को लेकर विपक्ष में रहते हुए सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाता था, उन्हीं सड़कों की बदहाली अब भी बरकरार है, लेकिन विरोध के स्वर कहीं सुनाई नहीं दे रहे।

शहर के कई प्रमुख मार्ग आज भी गड्ढों, जलभराव और टूटी सड़कों की समस्या से जूझ रहे हैं। बारिश ने हालात और खराब कर दिए हैं। आम लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं में सड़कें अब पीछे छूटती दिख रही हैं।

जनता सवाल पूछ रही है कि क्या सड़कों की समस्या सिर्फ विपक्ष में रहते हुए ही दिखाई देती थी? क्या सत्ता में आने के बाद वही मुद्दे महत्वहीन हो गए? जो नेता कभी “जनहित की लड़ाई” का दावा करते थे, वे अब केवल स्वागत, सम्मान और बधाई कार्यक्रमों तक ही सीमित क्यों नजर आ रहे हैं?

राजनीति में सत्ता और विपक्ष की भूमिका बदल सकती है, लेकिन जनता की समस्याएं नहीं। सड़कें आज भी बेहतर होने का इंतजार कर रही हैं और लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जनप्रतिनिधि राजनीति से ऊपर उठकर अपने पुराने वादों और संघर्षों को याद करेंगे।

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