
कोरबा। नगर निगम के गलियारों में आज कल हवा कुछ बदली-बदली सी है। फिजाओं में खुशबू किसी परफ्यूम की नहीं, बल्कि ‘राहत‘ की है। खबर है कि प्रभारी सम्पदा अधिकारी की विदाई क्या हुई, बाकी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तो जैसे ‘बिन मौसम होली’ शुरू हो गई है।
अंदर की बात बताने वालों ने तो यहाँ तक कह दिया है कि अगर निगम के पास बजट होता, तो आज दफ्तर के बाहर ढोल-ताशे और ‘बधाई हो’ के पोस्टर लग चुके होते!
दबी जुबां में ‘सच्ची’ बातें
निगम के गलियारों में जब हमारे जासूसों ने कान लगाए, तो कुछ ऐसे जुमले सुनने को मिले जो सोशल मीडिया पर वायरल होने लायक हैं:
“ये तो होना ही था!”: एक साहब तो अपनी फाइलें ऐसे पटक कर मुस्कुराए जैसे कह रहे हों “देर आए, दुरुस्त आए!”
“कुर्सी का मोह और साहब का खौफ“: चर्चा है कि साहब की कुर्सी जितनी भारी थी, उससे कहीं ज्यादा भारी उनका ‘अंदाज’ था। अब जब कुर्सी खाली हुई है, तो कई लोगों का बीपी (BP) नॉर्मल हो गया है।
“जश्न-ए-आजादी“: कुछ कर्मचारी तो व्हाट्सएप ग्रुप्स पर ऐसे इमोजी भेज रहे हैं जैसे जेल से रिहा हुए हों।
आखिर माजरा क्या है?
कहा जा रहा है कि प्रभारी साहब का ‘वर्किंग स्टाइल’ थोड़ा टेढ़ा था। काम कम और तनाव ज्यादा वाली स्थिति बनी हुई थी। अब उनके हटते ही अधिकारियों के बीच गुपचुप तरीके से ‘लड्डू’ बंटने की खबरें भी आ रही हैं। हालांकि, ये लड्डू किसी दुकान के हैं या सिर्फ ‘मन की खुशी’ के, इसकी पुष्टि होना बाकी है!



