
कोरबा ।कोरबा में अपराध नियंत्रण का “परेड मॉडल” फिर सुर्खियों में है लेकिन इस बार तालियों से ज्यादा सवाल गूंज रहे हैं, तस्वीरों से ज्यादा सवाल वायरल हो रहे हैं। 90 से ज्यादा कथित निगरानी बदमाशों को लाइन में खड़ा कर चेतावनी और फोटो सेशन करने वाली कार्रवाई को पुलिस भले ही बड़ी उपलब्धि बता रही हो, मगर शहर की जनता इसे औपचारिक “स्क्रिप्टेड शो” मान रही है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद शहर में अलग ही चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि पुलिस जिन लोगों को “निगरानी बदमाश” बताकर परेड करा रही है, उनमें से कई पर दर्ज मामले पुराने, मामूली या फिर कथित तौर पर फर्जी हैं। कुछ लोगों को सिर्फ थाने की “लिस्ट” में डालकर बदमाश बना दिया गया, जबकि इलाके में सक्रिय असली अपराधी अब भी बेखौफ घूम रहे हैं।
जनता सवाल उठा रही है कि अगर पुलिस को अपराधियों की इतनी ही जानकारी है और उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, तो फिर चोरी, मारपीट, कबाड़, जुआ, नशा और अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही?
अभियान के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने अपराध से दूर रहने की नसीहत दी और दोबारा अपराध करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी। हालांकि शहर के लोग इसे “रूटीन शो” और “फोटो सेशन” से ज्यादा कुछ नहीं मान रहे।
लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि हर कुछ महीनों में बदमाशों की लाइन लगाकर फोटो जारी कर दी जाती है, लेकिन जमीनी हालात वही के वही रहते हैं। कई लोगों का कहना है कि छोटे-मोटे मामलों में नाम आने वालों को तो पुलिस बार-बार उठा लेती है, लेकिन रसूखदार और बड़े नेटवर्क वाले अपराधियों तक कार्रवाई अक्सर पहुंच ही नहीं पाती।
शहर में यह चर्चा भी है कि “मुख्यधारा में लौटने” की सलाह देने से पहले पुलिस को यह भी देखना चाहिए कि कितने मामलों में जांच निष्पक्ष हुई और कितनों को सिर्फ आंकड़े बढ़ाने के लिए निगरानी सूची में डाल दिया गया।
फिलहाल पुलिस का दावा है कि अपराध नियंत्रण के लिए निगरानी लगातार जारी है, लेकिन जनता का कहना है कि “परेड और प्रेस नोट से ज्यादा जरूरत असली अपराधियों पर असरदार कार्रवाई की है।”



