कोरबा

Korba Ash Management : कागजों में 200% निष्पादन…! जमीन पर ओवरफ्लो…CSEB के आंकड़ों पर उठे बड़े सवाल

राख उपयोग के दावों के बीच कोरबा के बांधों पर बढ़ा दबाव

कोरबा, 21 अप्रैल। Korba Ash Management : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में राखड़ प्रबंधन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) और संबंधित पावर प्लांट्स द्वारा राख यूटिलाइजेशन में 200 प्रतिशत तक निष्पादन के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इन आंकड़ों से मेल नहीं खा रही। स्थानीय स्तर पर कई राखड़ बांधों पर क्षमता से अधिक दबाव की स्थिति सामने आ रही है, जिससे ओवरफ्लो और सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे पर्यावरण और संरचनात्मक सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता गहराती जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड में राख का निष्पादन 200 प्रतिशत से अधिक दिखाया जा रहा है, तो फिर बांधों में जगह की कमी और लगातार बढ़ता दबाव क्यों दिखाई दे रहा है। आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच यह अंतर अब बहस का मुख्य मुद्दा बन गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, DSPM (CSEB कोरबा पूर्व) ने 87,122.60 MT राख उत्पादन के मुकाबले 203.47% उपयोगिता दर दर्ज करने का दावा किया है, जबकिछत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के HTPP कोरबा (पश्चिम) यूनिट ने 173.76% उपयोगिता दर बताई है। हालांकि जानकारों का कहना है कि कागजों पर मजबूत दिख रहे ये आंकड़े वास्तविक उपयोग की पूरी तस्वीर नहीं दर्शाते। कई स्थानों पर राख का उचित और व्यवस्थित उपयोग नहीं हो पाने से उसका संचय लगातार बढ़ रहा है। इस बीच स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों ने पूरे मामले की पारदर्शी जांच और स्वतंत्र ऑडिट की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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