
रायपुर/छत्तीसगढ़। Government strict order on diesel and petrol sale प्रदेश में बढ़ते ईंधन संकट और कालाबाजारी की आशंकाओं के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने पेट्रोल-डीजल बिक्री को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब पेट्रोल पंपों से सामान्य उपभोक्ताओं को ड्रम, बोतल, जरीकेन या अन्य कंटेनरों में ईंधन नहीं दिया जाएगा। ईंधन केवल सीधे वाहनों की टंकी में ही भरा जाएगा।
सरकार ने यह आदेश पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न परिस्थितियों और प्रदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया है।
कालाबाजारी रोकने सरकार की सख्ती
आदेश में कहा गया है कि यदि कोई रिटेल आउटलेट संचालक ड्रम, बोतल या जरीकेन में पेट्रोल-डीजल बेचता पाया गया, तो इसे “अनाधिकृत विक्रय” माना जाएगा। ऐसे मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का मानना है कि खुले कंटेनरों में ईंधन बिक्री से कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध परिवहन को बढ़ावा मिलता है।
किसानों और कांट्रेक्टरों को राहत
हालांकि सरकार ने किसानों के साथ-साथ कांट्रेक्टरों और निर्माण कार्यों को भी राहत दी है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रबी फसल कटाई, खरीफ सीजन की तैयारी, सड़क निर्माण, भवन निर्माण और समय-सीमा में पूरे किए जाने वाले शासकीय कार्यों के लिए कंटेनरों में डीजल दिए जाने की अनुमति रहेगी।इसके अलावा अस्पताल, मोबाइल टावर जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को भी इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
अनुमति के बाद मिलेगा डीजल
आदेश के अनुसार किसानों, कांट्रेक्टरों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्यों के लिए जिला कलेक्टर द्वारा चिन्हित जरूरतों के आधार पर अनुमति दी जाएगी। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मांग का परीक्षण करने के बाद पेट्रोल पंप संचालकों को डीजल देने की अनुमति प्रदान करेंगे।
विकास कार्यों पर नहीं लगेगा ब्रेक
सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि कालाबाजारी पर सख्ती के साथ-साथ विकास कार्य और जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। इसलिए निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को विशेष प्रावधान के तहत राहत दी गई है।



