कोरबा।Korba Diesel Crisis मिनी भारत कहलाने वाले कोरबा में इन दिनों डीजल संकट ने विकास कार्यों की रफ्तार थाम दी है। डिब्बों और ड्रमों में डीजल देने पर रोक के कारण सरकारी और निजी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। भारी मशीनरी साइटों पर खड़ी है और ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के नुकसान का खतरा सताने लगा है।
भारी मशीनरी हुई बंद
जानकारी के मुताबिक जेसीबी, पोकलेन, डंपर और कंक्रीट मिक्सर जैसी मशीनें ईंधन के अभाव में बंद पड़ी हैं। ठेकेदारों का कहना है कि हर मशीन को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं होता, इसलिए साइट पर डीजल पहुंचाने के लिए डिब्बों और ड्रमों का इस्तेमाल जरूरी है। लेकिन पंपों द्वारा डिब्बों में डीजल देने से इनकार किए जाने से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
प्रभावित हो रहे विकास और जनकल्याण कार्य
सड़क निर्माण, पेयजल योजनाएं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट अधर में लटक गए हैं। निर्माण कार्य धीमा पड़ने से परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है, वहीं मजदूरों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा होने लगा है। समय पर काम पूरा नहीं होने पर ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान और पेनाल्टी का डर सता रहा है।
कालाबाजारी का बढ़ा नेटवर्क
डीजल संकट का फायदा अब मुनाफाखोर उठा रहे हैं। क्षेत्र में ब्लैक में डीजल बेचे जाने की शिकायतें बढ़ रही हैं। मजबूरी में ठेकेदार ऊंचे दामों पर डीजल खरीदने को विवश हैं। वहीं अवैध रूप से बिक रहे ईंधन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे महंगी मशीनों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन से राहत की मांग
स्थानीय ठेकेदारों ने प्रशासन से मांग की है कि पंजीकृत कॉन्ट्रैक्टर्स को कमर्शियल उपयोग के लिए विशेष अनुमति या पास जारी किए जाएं, ताकि वे निर्धारित नियमों के तहत डिब्बों में डीजल ले जा सकें। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो सकते



