कोरबा। Korba Sand Smuggling Sajjad जिले में अवैध रेत कारोबार अब खुलेआम सिस्टम को चुनौती देता नजर आ रहा है। सीतामणी क्षेत्र इन दिनों रेत तस्करी का अड्डा बन चुका है, जहां हसदेव नदी की छाती चीरकर दिनदहाड़े रेत निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस सज्जाद का नाम लगातार अवैध रेत कारोबार में सामने आ रहा है, उसकी गाड़ियों पर कार्रवाई करने में जिम्मेदार अधिकारी बेबस नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत तस्करी से जुड़े वाहन बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ छोटे ट्रैक्टर चालकों या मजदूरों तक सीमित रह जाती है। बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचते ही कार्रवाई की रफ्तार थम जाती है। यही वजह है कि अब लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर सज्जाद की गाड़ियों पर हाथ डालने से अधिकारी डर क्यों रहे हैं?
“मैजिक पेन” से लिखी जा रही रॉयल्टी की कहानी!
सूत्रों की मानें तो अवैध रेत परिवहन को वैध दिखाने के लिए रॉयल्टी पर्चियों में खेल किया जा रहा है। आरोप है कि “मैजिक पेन” से तारीख और मात्रा बदलकर एक ही रॉयल्टी पर कई बार रेत परिवहन कराया जा रहा है। खनिज विभाग की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि बिना मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर खेल संभव नहीं माना जा रहा।
सीतामणी बना “रेत लियारी”
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सीतामणी क्षेत्र में देर रात से लेकर सुबह तक हाईवा और ट्रैक्टरों की कतार लगी रहती है। नदी घाटों से निकलने वाली रेत सीधे शहर और बाहरी इलाकों में पहुंचाई जा रही है। धूल, खराब सड़कें और दुर्घटना का खतरा अलग से लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
अफसरों की चुप्पी ने बढ़ाए सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा करता है, तब सज्जाद जैसे बड़े नामों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही, या फिर विभागीय मिलीभगत इस पूरे खेल की सबसे बड़ी वजह है?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई करता है या फिर सीतामणी की रेत यूं ही सिस्टम की आंखों के सामने लूटी जाती रहेगी।



