
कोरबा। Korba Forest Division JCB corruption जंगल में तालाब बन रहा है… कागजों में मजदूर पसीना बहा रहे हैं… और जमीन पर जेसीबी आराम से ‘ड्यूटी’ निभा रही है। बालको रेंज के गहनिया इलाके में चल रहा यह काम अब चर्चा का विषय बन चुका है। वजह साफ है यहां नियम किताबों में हैं और काम मशीनों के भरोसे।

कहानी थोड़ी फिल्मी है…
वन्य प्राणियों के लिए तालाब बनना था ताकि जंगल में पानी की कमी न रहे। लेकिन यहां तो कहानी ने नया मोड़ ले लिया।जहां मजदूरों को रोजगार मिलना चाहिए था, वहां जेसीबी ने एंट्री मार ली। और मजदूर? वो कागजों में अपनी हाजिरी लगाकर शायद कहीं और काम ढूंढ रहे होंगे।
कागज बोले“सब ठीक है”मस्टर रोल कहता है कि मजदूरों ने मेहनत की है।जमीन कहती है कि मशीन ने पूरा काम संभाला है और भुगतान? वो भी ऐसे खातों में पहुंचा जिनका तालाब से रिश्ता उतना ही साफ है जितना जंगल में वाई-फाई सिग्नल,सवाल जो पूछने चाहिए… पर शायद पूछे नहीं जाते।
क्या अधिकारियों को सच में कुछ पता नहीं, या फिर “सब पता है”?
मजदूरों के नाम असली हैं या सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए?
तालाब मजबूत बनेगा या पहली बारिश में ही ‘भावनाओं’ की तरह बह जाएगा?
असली खेल क्या है?
जंगल में पानी पहुंचाने की योजना थी, लेकिन यहां तो लगता है “नोटों की नमी” ज्यादा अहम हो गई है। वन्य प्राणी पानी पिएं या न पिएं, सिस्टम जरूर “फायदे” का रस ले रहा है।
जांच की मांग
स्थानीय लोग जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन अनुभव कहता है कि जांच भी अक्सर उसी रास्ते पर चलती है, जिस पर यह जेसीबी चल रही है सीधे नहीं, सुविधानुसार। फिलहाल हालात ऐसे हैं कि जंगल के जानवर अगर बोल पाते, तो शायद पूछते “हमारे नाम पर जो तालाब बन रहा है, उसमें पानी आएगा या सिर्फ फाइलों में लहरें उठेंगी?”



