Bagaha Crime News : पत्नी की हत्या कर शव के किए 3 टुकड़े, बोरियों में फेंका; अब पति को उम्रकैद, 2 बच्चों को हर महीने मिलेंगे ₹4-4 हजार
Bagaha Crime News : पत्नी की बेरहमी से हत्या करने वाले पति को उम्रकैद, 2 बच्चों के लिए हर महीने ₹8 हजार की मदद
बगहा, 18 अगस्त। Bagaha Crime News : बिहार के बगहा में पत्नी की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हत्या के बाद शव के तीन टुकड़े कर अलग-अलग बोरियों में डालकर फेंकने का मामला सामने आया था।
इस मामले में अदालत ने दोषी को सजा देने के साथ उसके दोनों नाबालिग बच्चों के भविष्य को लेकर भी अहम आदेश दिया है। बिहार सरकार को परवरिश योजना के तहत दोनों बच्चों को हर महीने 4-4 हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया है।
मोटरसाइकिल और भैंस को लेकर हुआ था विवाद
मामला धनहा थाना क्षेत्र के बैरा बाजार टोला मुसहरी का है। अभियोजन के मुताबिक, बुनिलाल यादव के बेटे सुभाष यादव पर अपनी पत्नी रीना देवी की हत्या का आरोप था।
मामले में 30 जुलाई 2020 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार मोटरसाइकिल और भैंस को लेकर हुए विवाद के बाद सुभाष यादव ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी।
हत्या के बाद शव को जलाने और सबूत मिटाने की कोशिश किए जाने का भी आरोप था। इसके बाद शव के तीन टुकड़े कर अलग-अलग बोरियों में डालकर फेंक दिया गया।
गले से मिली चाबी से हुई शव की पहचान
पुलिस जांच के दौरान मृतका के गले से एक संदूक की चाबी मिली। इसी आधार पर शव की पहचान रीना देवी के रूप में किए जाने की बात सामने आई।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के साथ गवाहों के बयान भी पेश किए।
पति को उम्रकैद, 1 लाख रुपये जुर्माना
बगहा एडीजे-4 मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद सुभाष यादव को हत्या का दोषी माना।
कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर दोषी को 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा धारा 201 के तहत भी 7 साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
मां की हत्या और पिता को उम्रकैद… अब बच्चों को मिलेगा सरकारी सहारा
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह रहा कि अदालत ने मृतका के दोनों नाबालिग बच्चों के भविष्य को भी ध्यान में रखा। मां की हत्या हो चुकी है और पिता को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद दोनों बच्चों के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया। ऐसे में अदालत ने बिहार सरकार को परवरिश योजना के तहत दोनों बच्चों को हर महीने 4-4 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। यानी दोनों बच्चों को मिलाकर हर महीने 8 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके साथ ही अदालत ने बच्चों को डीएलसी पुनर्वास योजना का लाभ देने का भी निर्देश दिया है।
स्पीडी ट्रायल से हुआ मामले का निपटारा
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत कराई गई। पुलिस जांच में जुटी टीम के साथ बगहा एसपी द्वारा भी मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी किए जाने की जानकारी सामने आई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
कोर्ट का फैसला सिर्फ सजा तक सीमित नहीं
इस मामले में अदालत का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाने के साथ उन दो मासूम बच्चों के भविष्य की चिंता की, जिनकी मां की हत्या हो चुकी है और पिता को उम्रकैद मिली है। परवरिश योजना के तहत आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजना का लाभ मिलने से बच्चों को आगे की पढ़ाई और जीवन-यापन में मदद मिलने की उम्मीद है।















