CG High Court का बड़ा फैसला…! परिवार में एक सदस्य सरकारी नौकरी में है तो दूसरे को नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति
कोई दलील नहीं चलेगी
बिलासपुर, 17 अगस्त। CG High Court : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल सकता। कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट सरकारी नीति के रहते केवल आर्थिक निर्भरता या पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर नियमों में छूट नहीं दी जा सकती।
यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने जशपुर निवासी आदित्य चौहान की याचिका पर सुनाया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित सरकारी नीति को प्रभावी माना।
क्या है पूरा मामला?
आदित्य चौहान के पिता लक्ष्मण दास चौहान पुलिस विभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत थे। कोविड काल के दौरान 23 सितंबर 2020 को उनका निधन हो गया था। इसके बाद आदित्य ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
सक्षम प्राधिकारी ने 31 अक्टूबर 2025 को आवेदन खारिज कर दिया। इसकी वजह यह बताई गई कि मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी उमा तिवारी पहले से सिंचाई विभाग में सहायक के पद पर सरकारी नौकरी कर रही हैं।
कोई दलील नहीं चलेगी
याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि उमा तिवारी परिवार से अलग रहती हैं और आर्थिक रूप से परिवार की मदद नहीं करतीं। इसलिए उनकी सरकारी नौकरी को आदित्य की अनुकंपा नियुक्ति में बाधा नहीं माना जाना चाहिए।
लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
हाई कोर्ट ने सरकारी नीति को माना निर्णायक
कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सामान्य प्रशासन विभाग की 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मृत विवाहित सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है, तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना जा सकता।
यानी परिवार में किसी सदस्य की सरकारी नौकरी होने की स्थिति में केवल यह तर्क कि वह अलग रहता है या आर्थिक मदद नहीं करता, अनुकंपा नियुक्ति का दावा मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य क्या है?
हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार के सामने पैदा हुई तत्काल आर्थिक कठिनाई से राहत देना है।
यह किसी व्यक्ति का सामान्य रोजगार पाने का अधिकार नहीं है। इसलिए अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में संबंधित सरकारी नीति और उसमें निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन जरूरी है।
हाई कोर्ट के फैसले का सीधा मतलब
परिवार के किसी अन्य सदस्य के सरकारी नौकरी में होने पर दूसरे सदस्य का अनुकंपा नियुक्ति का दावा सामान्य तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। आर्थिक निर्भरता या अलग रहने जैसे व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर स्पष्ट सरकारी नीति में छूट नहीं दी जा सकती।















