
कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अधूरे पड़े आवासों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार गरीबों को पक्के मकान देने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। जिले में करीब एक हजार हितग्राहियों के मकान दूसरी और तीसरी किस्त के भुगतान के अभाव में अधूरे पड़े हुए हैं।
प्रेस नोट जारी कर अग्रवाल ने कहा कि अनेक हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया मकान बनाने के लिए अपने पुराने घर तक तोड़ दिए, लेकिन पहली किस्त मिलने के बाद अगली किस्तें लंबे समय से जारी नहीं की गईं। इससे निर्माण कार्य बीच में रुक गया है और परिवारों को रहने के लिए गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम सिर पर है, लेकिन कई हितग्राहियों के सिर पर छत नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अधूरे मकानों में रहने को मजबूर हैं या फिर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अतिरिक्त खर्च उठा रहे हैं।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यदि सरकार के पास वित्तीय संसाधनों की कमी है तो सबसे पहले पहले से स्वीकृत और निर्माणाधीन आवासों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई-नई घोषणाएं कर रही है, जबकि हजारों गरीब परिवार वर्षों से अपनी दूसरी और तीसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि लंबित किस्तों का तत्काल भुगतान किया जाए, ताकि अधूरे आवासों का निर्माण जल्द पूरा हो सके और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास मिल सके।
अग्रवाल ने दावा किया कि वार्ड क्रमांक 1, 4, 10, 19, 20, 22 और 36 सहित कई क्षेत्रों के हितग्राही लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें दूसरी या तीसरी किस्त अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि बरसात से पहले सभी लंबित भुगतान जारी कर प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान की जाए।






