
कोरबा। नगर निगम डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां सरकारें ‘सिंगल विंडो सिस्टम‘ के लिए लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं हमारे शहर के नगर निगम के गेट पर एक महापुरुष ने बिना किसी सरकारी बजट के, बिल्कुल मुफ्त में एक ‘दिव्य सिंगल विंडो’ खोल दी है।
आजकल नगर निगम के मुख्य द्वार पर एक पण्डा नुमा वेशभूषा में सजे-धजे सज्जन दिखाई देते हैं। वे सिर्फ गेट पर ही नहीं विराजते, बल्कि जनता के काम और अधिकारियों की जेब के बीच एक अटूट ‘आध्यात्मिक सेतु’ का काम कर रहे हैं।
फाइल का साइज देखकर तय होती है ‘दक्षिणा’
गेट पर बैठे इन ‘पंडा जी’ के पास नगर निगम के हर छोटे-बड़े अधिकारी की कुंडली मौजूद है। पीड़ित जनता को अब निगम के गलियारों में भटकने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। पंडा जी गेट पर ही आपकी फाइल का वजन देखकर बता देते हैं कि कौन सा अधिकारी किस फाइल को कितनी ‘गति’ देगा। किस साहब का ‘आशीर्वाद’ कितने प्रतिशत कमीशन (दक्षिणा) पर प्राप्त होगा। कौन सा बाबू बिना ‘चढ़ावे’ के नाराज हो जाता है।
एक तरह से देखा जाए तो पंडा जी ने निगम में फैले भ्रष्टाचार को एक सुव्यवस्थित ‘रेट कार्ड’ में बदल दिया है, जिससे जनता का समय बच रहा है। अब ठेकेदारों और आम नागरिकों को यह सोचने में दिमाग नहीं खपाना पड़ता कि किसे कितना देना है; पंडा जी ‘दर’ तय करके मामला तुरंत ऑन-द-स्पॉट सेट कर देते हैं।
सुबह-शाम आरती: पाप धोने का डेली शेड्यूल
पंडा जी की कार्यशैली जितनी व्यावहारिक है, उतनी ही आध्यात्मिक भी है। दिनभर फाइलें पास कराने और कमीशन की दरें तय करने के बाद, वे सुबह और शाम को निगम के गेट पर विराजित भगवान श्री गणेश की पूरे विधि-विधान से आरती करते हैं।निगम के गलियारों में लोग चुटकी ले रहे हैं कि पंडा जी की यह आरती भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए कम, और दिनभर में अधिकारियों द्वारा कमाए गए ‘कमीशन के पाप’ धोने के लिए ज्यादा होती है। कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि पंडा जी आरती में ‘जय गणेश देवा’ की जगह ‘जय रमेश देवा, जय दिनेश देवा’ (अधिकारियों के नाम) गाते हैं, क्योंकि विघ्नहर्ता तो आखिरकार अंदर बैठे साहब लोग ही हैं, जो बिना दक्षिणा के फाइल आगे बढ़ने नहीं देते।
जनता की मांग: इन्हें परमानेंट किया जाए!
नगर निगम के अंदर बैठे जो अधिकारी कल तक जनता को सीधे मुंह जवाब नहीं देते थे, वे भी इन पंडा जी के आगे नतमस्तक रहते हैं। आखिरकार, पंडा जी उनके लिए ‘बिज़नेस’ जो ला रहे हैं।
अब शहर की जनता मेयर मैडम से मांग कर रही है कि गेट पर बैठे इस पंडा नुमा व्यक्ति को ‘निगम का आधिकारिक दलाल’ घोषित कर एक केबिन अलॉट कर दिया जाए, ताकि धूप-बारिश में भी कमीशन तय करने का यह पावन और धार्मिक कार्य बिना किसी ‘विघ्न’ के चलता रहे। तब तक के लिए, आप भी नगर निगम जाइए, पंडा जी से रेट पूछिए, साहब को चढ़ाया चढ़ाइए और बोलिए आरती कुंज बिहारी की, जय निगम अधिकारी की!





