Bango Displaced : बांगो विस्थापितों के समर्थन में कांग्रेस का महासम्मेलन…! एक मंच पर आए महंत-बैज-टीएस सिंहदेव…मछली आखेट का अधिकार लौटाने की मांग
52 गांवों के विस्थापित परिवार सम्मेलन में पहुंचे
कोरबा, 24 मई। Bango Displaced : हसदेव बांगो बांध के विस्थापित परिवारों के समर्थन में रविवार को बुका में महासम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने विस्थापित परिवारों को बांगो बांध में मछली आखेट और बिक्री का स्वतंत्र अधिकार वापस देने की मांग उठाई।
52 गांवों के विस्थापित परिवार सम्मेलन में पहुंचे
महासम्मेलन में बांगो बांध से प्रभावित 52 गांवों के विस्थापित परिवार बड़ी संख्या में शामिल हुए। महिलाओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। विस्थापितों ने बताया कि वर्ष 1991 में विस्थापन के बाद शुरुआती वर्षों तक वे स्वयं मछली पकड़कर सरकार को मामूली रॉयल्टी देते थे और इसी से अपनी आजीविका चलाते थे। वर्ष 2003 में ठेका प्रथा लागू होने के बाद से उनका यह अधिकार समाप्त हो गया, जिसके खिलाफ वे लगातार आंदोलन और संघर्ष कर रहे हैं।
आदिवासियों के साथ हो रही मारपीट : नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने अपने संबोधन में कहा कि विस्थापित आदिवासियों के साथ मारपीट की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई आदिवासी जलाशय से मछली निकालने का प्रयास करता है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।
महंत ने कहा कि सरकार स्वयं विधानसभा में यह स्वीकार कर चुकी है कि वर्ष 2007 से लागू वनाधिकार कानून जलाशयों में मछली पकड़ने वाले आदिवासियों पर भी लागू होता है, लेकिन अब तक इस कानून का पालन नहीं किया गया है।
अधिकार नहीं मिला तो हाईकोर्ट जाएगी कांग्रेस : चरणदास महंत
डॉ. चरणदास महंत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जल्द ही विस्थापितों को उनका अधिकार वापस नहीं देती, तो कांग्रेस पार्टी उनके साथ मिलकर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
पेसा कानून आज तक लागू नहीं किया : सिंहदेव
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि वर्ष 2022 में मंत्री रहते हुए उन्होंने पेसा कानून का प्रारूप तैयार किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद आज तक उसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
वनाधिकार कानून के बावजूद नहीं मिला हक
बता दें कि छत्तीसगढ़ में 1,000 हेक्टेयर से अधिक बड़े जलाशयों में मछली पालन के लिए ठेका पद्धति लागू है। वहीं आदिवासी क्षेत्रों में वनाधिकार कानून के तहत मछली संसाधनों पर पहला अधिकार आदिवासियों का माना गया है। इसके बावजूद विस्थापित परिवारों को अब तक उनका अधिकार नहीं मिल सका है। सम्मेलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की मौजूदगी रही।



