Honeytrap-2 : इंदौर से छत्तीसगढ़ तक मचा बवाल…! VIDEO में DIG का नाम आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप…करोड़ों की ब्लैकमेलिंग का खुलासा
करोड़ों की रंगदारी, अब बड़े नामों पर नजर
इंदौर, 24 मई। Honeytrap-2 : मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए हनीट्रैप-2 मामले ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। इस बार मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस के एक DIG रैंक अधिकारी का नाम सामने आने की चर्चा ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इंदौर क्राइम ब्रांच का दावा है कि आरोपियों के मोबाइल और डिजिटल डिवाइस से मिले वीडियो में कई बड़े नेता, कारोबारी और अफसर नजर आ रहे हैं।
पुलिस ने इस मामले में श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गैंग रसूखदार लोगों को हनीट्रैप में फंसाकर अश्लील वीडियो बनाता था और फिर करोड़ों रुपए की ब्लैकमेलिंग करता था।
ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि भोपाल से श्वेता विजय जैन पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करती थी, जबकि रेशू चौधरी टारगेट सेट करने और उन्हें जाल में फंसाने का काम करती थी। पुलिस को शक है कि कुछ वीडियो बेचने की भी तैयारी थी।
मामले में मध्य प्रदेश के एक विधायक, कई कारोबारी, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के नेताओं, एक पूर्व अधिकारी, छत्तीसगढ़ के DIG रैंक अधिकारी, दिल्ली के वरिष्ठ नेता और गुजरात के उद्योगपति के नाम सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के एक नेता से करीब 4 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश रची गई थी।
कारोबारी की शिकायत से खुला राज
पूरा मामला तब सामने आया जब इंदौर के कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि सुपर कॉरिडोर पर अलका दीक्षित और उसके साथियों ने कारोबारी की कार रोककर मारपीट की और निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए 1 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी।
इसके बाद पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने ‘मिशन सीक्रेट’ चलाया। 40 पुलिसकर्मियों की 7 टीमें बनाकर अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की गई और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस विभाग तक पहुंची जांच
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब इंटेलिजेंस ब्रांच में तैनात हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा का नाम सामने आया। पुलिस का दावा है कि ब्लैकमेलिंग की पूरी स्क्रिप्ट उसी ने तैयार की थी। आरोप है कि अलका दीक्षित ने आपत्तिजनक वीडियो और फोटो विनोद शर्मा को भेजे थे और उसी ने कानूनी दबाव बनाकर वसूली की रणनीति बताई थी।
फिलहाल सभी आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ जारी है। पुलिस को आशंका है कि इस गैंग ने कई और रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपए वसूले हैं, लेकिन बदनामी के डर से पीड़ित सामने नहीं आए।



