कोरबा। Korba Congress political meeting छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस अब संगठन और जनआंदोलन दोनों मोर्चों पर नई रणनीति के संकेत देती नजर आ रही है। इसी कड़ी में पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का 24 और 25 मई का कोरबा-कटघोरा दौरा महज एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों का अहम संकेत माना जा रहा है।
Korba Congress political meetingइस दौरे की सबसे बड़ी राजनीतिक अहमियत इस बात को लेकर है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल एक ही मंच पर दिखाई देंगे। ऐसे समय में जब पीसीसी नेतृत्व को लेकर दीपक बैज और टीएस सिंहदेव के बीच बयानबाजी चर्चा में है, यह मंच कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भी कई संदेश देने वाला माना जा रहा है।
0.हसदेव सम्मेलन से आदिवासी राजनीति साधने की कोशिश
टीएस सिंहदेव 24 मई को अंबिकापुर से कटघोरा पहुंचेंगे, जहां ग्राम पंचायत मड़ई अंतर्गत ग्राम बुका में “जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य स्तरीय महासम्मेलन” में शामिल होंगे।
हालांकि सम्मेलन हसदेव जलाशय संघर्ष समिति द्वारा आयोजित किया जा रहा मगर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस मंच के जरिए आदिवासी अधिकार, विस्थापन और प्राकृतिक संसाधनों के मुद्दे को फिर से राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है।
हसदेव अंचल लंबे समय से वन, खनन और विस्थापन के सवालों को लेकर संवेदनशील क्षेत्र रहा है। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को जनआंदोलन के रूप में पुनर्जीवित कर भाजपा सरकार के खिलाफ जमीन तैयार करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
0.संगठन को संदेश, कार्यकर्ताओं में उत्साह
महासम्मेलन के बाद सिंहदेव कटघोरा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इसे संगठन में नई सक्रियता लाने और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संवाद बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
दौरे के दूसरे दिन 25 मई को सिंहदेव जमनीपाली, दर्री, बालको, कोरबा, कुसमुंडा, बांकीमोंगरा और पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस संगठन इसे जमीनी स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने और आगामी चुनावी समीकरणों को साधने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।
0.कांग्रेस के लिए क्यों अहम है यह दौरा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा हार के बाद कांग्रेस को राज्य में नए मुद्दों और नई ऊर्जा की जरूरत है। ऐसे में आदिवासी अधिकार, जल-जंगल-जमीन और विस्थापन जैसे विषय पार्टी को फिर से जनाधार से जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं।
टीएस सिंहदेव का यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वे सभी मंचों पर हसदेव को बचाने और पेसा कानून लागू करने का मुद्दा उठाते रहे हैं। ऐसे में
हसदेव सम्मेलन में सिंहदेव के साथ नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पीसीसी चीफ दीपक बैज का एक साथ मंच पर आना कहीं न कहीं ये संकेत देती है कि पार्टी आने वाले समय में संघर्ष आधारित राजनीति को फिर से केंद्र में ला सकती है।



