
Digital Arrest Scams: नई दिल्ली। डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट में दूरसंचार कंपनियों, बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के साथ ठगी रोकने के लिए कई ठोस तकनीकी और कानूनी उपाय सुझाए गए हैं।
Digital Arrest Scams: यह रिपोर्ट अदालत के 9 फरवरी 2026 के निर्देशों के अनुपालन में दाखिल की गई है, जिसमें एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, साइबर फ्रॉड की पहचान को मजबूत करने और पीड़ितों के मुआवजे के ढांचे पर काम करने को कहा गया था।
Digital Arrest Scams: सिम जारी करने पर कड़ी निगरानी
रिपोर्ट में बायोमेट्रिक आइडेंटिटी वेरिफिकेशन सिस्टम (BIVS) लागू करने का प्रस्ताव प्रमुख है। इसके तहत एक व्यक्ति को जारी सभी सिम कार्ड को रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सकेगा। दूरसंचार विभाग को तीन महीने के भीतर नियम अधिसूचित करने और छह महीने में तकनीकी प्रणाली लागू करने का लक्ष्य दिया गया है। सरकार दिसंबर 2026 तक देशभर में क्रॉस-ऑपरेटर सिम मॉनिटरिंग लागू करना चाहती है। इसके अलावा, अलग-अलग कंपनियों से कई सिम लेने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए ‘प्राइमरी सिम से अनुमति’ का प्रावधान भी सुझाया गया है।
Digital Arrest Scams: 2–3 घंटे में संदिग्ध सिम ब्लॉक करने की तैयारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल ठगी के मामलों में सिम के दुरुपयोग को रोकने के लिए संदिग्ध या फर्जी सिम को 2–3 घंटे के भीतर ब्लॉक करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। वर्तमान में प्रक्रिया लंबी होने के कारण अपराधी शुरुआती घंटों में ही वारदात को अंजाम दे देते हैं।
Digital Arrest Scams: टेलीकॉम कंपनियों और PoS एजेंटों की जवाबदेही
रिपोर्ट में सिम जारी करने वाले प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंटों की जिम्मेदारी सीधे टेलीकॉम कंपनियों पर तय करने की बात कही गई है। फर्जी सिम जारी होने पर कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। साथ ही, PoS एजेंटों की पहचान और ट्रैकिंग को मजबूत करने और सिम सप्लाई चेन का पूरा डेटा डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है।कंपनियों को AI आधारित सिस्टम के जरिए संदिग्ध कॉल पैटर्न और सिम उपयोग की निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
Digital Arrest Scams: व्हाट्सऐप पर सख्ती
डिजिटल ठगी में व्हाट्सऐप के दुरुपयोग को देखते हुए रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। व्हाट्सऐप ने कई अहम प्रतिबद्धताएं जताई हैं, जिनमें डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा 180 दिन तक सुरक्षित रखना, फर्जी डिवाइस आईडी को ब्लॉक करना और पुलिस या CBI के लोगो के दुरुपयोग को रोकने के लिए AI सिस्टम को मजबूत करना शामिल है। इसके अलावा, संदिग्ध कॉल या मैसेज पर यूजर्स को अलर्ट देने और ‘SIM बाइंडिंग’ फीचर को 4–6 महीने में लागू करने की बात कही गई है।
Digital Arrest Scams: 10 करोड़ से अधिक मामलों की CBI जांच
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 10 करोड़ रुपए से अधिक की डिजिटल ठगी के मामलों की जांच CBI को सौंपी गई है। गुजरात और दिल्ली के तीन मामलों को CBI ने अपने हाथ में लिया है। दिल्ली के एक मामले में 22.92 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई है, जिसकी जांच जारी है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से बड़े साइबर अपराध नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
सवाल: डिजिटल अरेस्ट क्या है?
जवाब: डिजिटल अरेस्ट एक साइबर ठगी का तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें ऑनलाइन “निगरानी” या “गिरफ्तारी” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
सवाल: केंद्र सरकार ने इस पर क्या कदम उठाए हैं?
जवाब: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सिम कार्ड, डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय करने के साथ कई तकनीकी और कानूनी उपाय सुझाए हैं।
सवाल: BIVS क्या है और इसका क्या फायदा होगा?
जवाब: BIVS (Biometric Identity Verification System) एक ऐसा सिस्टम होगा, जिससे एक व्यक्ति के नाम पर जारी सभी सिम कार्ड को रियल-टाइम में ट्रैक किया जा सकेगा। इससे फर्जी सिम के इस्तेमाल पर रोक लगेगी।
सवाल: फर्जी या संदिग्ध सिम पर क्या कार्रवाई होगी?
जवाब: प्रस्ताव है कि ऐसे सिम को 2–3 घंटे के भीतर ब्लॉक किया जाए, ताकि ठग शुरुआती समय में ही ठगी न कर सकें।
सवाल: क्या टेलीकॉम कंपनियों की जिम्मेदारी तय की गई है?
जवाब: हां, सिम जारी करने वाले PoS एजेंटों की जिम्मेदारी सीधे टेलीकॉम कंपनियों पर होगी। फर्जी सिम जारी होने पर कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सवाल: व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर क्या सख्ती होगी?
जवाब: व्हाट्सऐप को डिलीट अकाउंट का डेटा 180 दिन तक सुरक्षित रखने, फर्जी डिवाइस ID ब्लॉक करने, और संदिग्ध कॉल/मैसेज पर यूजर्स को अलर्ट देने जैसे कदम उठाने होंगे।
सवाल: SIM बाइंडिंग फीचर क्या है?
जवाब: SIM बाइंडिंग एक सुरक्षा फीचर है, जिसमें यूजर का अकाउंट एक विशेष सिम से जुड़ा होगा, जिससे अनधिकृत एक्सेस या फर्जी इस्तेमाल को रोका जा सकेगा।
सवाल: बड़े साइबर ठगी मामलों की जांच कौन करेगा?
जवाब: 10 करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल ठगी के मामलों की जांच CBI द्वारा की जाएगी।
सवाल: आम लोग खुद को इस तरह की ठगी से कैसे बचा सकते हैं?
जवाब: किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें, सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने वालों पर भरोसा न करें, और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस में शिकायत दर्ज करें।



