
कोरबा।Korba Ash Transport Scamअगर आपको लगता है कि दुनिया में जादुई शक्तियां खत्म हो गई हैं, तो आपको छत्तीसगढ़ के पॉवर हब कोरबा के डंगनिया राखड़ डैम का दौरा जरूर करना चाहिए। यहाँ सीएसईबी (CSEB) के आशीर्वाद से ट्रांसपोर्टर्स ने भौतिक विज्ञान के नियमों को चुनौती दे दी है। ट्रक आधे खाली हैं, लेकिन उनका वजन और बिल ‘पुल लोडेड’ वाला निकल रहा है। इसे कहते हैं “आधा राख, पूरा माल, सिस्टम बेमिसाल!”
खाली ट्रक में ‘खजाना’ खोजने की कला
कोरबा में इन दिनों कोयले से ज्यादा चमक ‘राख’ में आ गई है। वैसे तो राख को कचरा माना जाता है, लेकिन यहाँ के सिस्टम ने इसे ‘ब्लैक गोल्ड‘ बना दिया है। तकनीक ऐसी है कि ट्रक में राख उतनी ही भरी जाती है जितनी एक छोटे गमले में समा जाए, लेकिन कागजों पर पहुंचते-पहुंचते वह राख ‘हिमालय’ के वजन के बराबर होजाती है।
सूत्रों का कहना है कि यह परिवहन नहीं, बल्कि ‘हवा का व्यापार’ है। ट्रक ड्राइवर बड़े गर्व से आधा खाली ट्रक लेकर निकलते हैं, जैसे वे राख नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदें ढो रहे हों जो हल्की तो बहुत हैं, पर उन पर खर्च करोड़ों का होता है।
मॉनिटरिंग सिस्टम: ‘गांधारी’ मोड में अधिकारी
CSEB का मॉनिटरिंग सिस्टम इस समय पूरी तरह ‘गांधारी मोड’ में है। उनकी आँखों पर नियमों की पट्टी बंधी है। जीपीएस ट्रैकिंग, वेट मशीन और सीसीटीवी कैमरे सब मौजूद हैं, पर शायद वे भी इस जादुई खेल को देखकर अपनी पलकें झपका लेते हैं।
जब लोडिंग साइट पर अधिकारी तैनात हों और फिर भी आधा ट्रक ‘फुल’ दिखे, तो समझ लेना चाहिए कि अधिकारियों की नजरें कमजोर नहीं हैं, बल्कि उनका ‘नजरिया’ बहुत ऊँचा (और महंगा) है।
राख बनी ‘सोने की खदान’
पुराने जमाने में लोग पारस पत्थर ढूंढते थे जिससे लोहा सोना बन जाए। कोरबा के ट्रांसपोर्टरों ने राख को ही सोना बना लिया है।
जनता देख रही है ‘लाइव कॉमेडी’
स्थानीय लोग इस तमाशे को रोज देख रहे हैं। सड़क पर उड़ती राख आंखों में जाती है, तो सिस्टम की ‘सच्चाई’ अपने आप नजर आने लगती है। जनता अब मांग कर रही है कि इस ‘जादूगर’ ट्रांसपोर्टर और ‘मौन’ अधिकारियों को अवॉर्ड मिलना चाहिए, क्योंकि इतनी सफाई से सरकारी धन की बंदरबांट करना हर किसी के बस की बात नहीं है।
जांच के नाम पर चल रहा सेटिंग
अब देखना यह है कि जांच की फाइलें खुलती हैं या हमेशा की तरह उन पर भी राख की एक मोटी परत जम जाती है। फिलहाल तो कोरबा में नारा गूंज रहा है “राख उड़ाओ, नोट कमाओ, सिस्टम को ठेंगा दिखाओ!”



