
कोरबा। कोरबा-चांपा मार्ग स्थित अडानी पावर प्लांट में हालात अब गरमाने लगे हैं। यहां काम कर रहे श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर प्रबंधन के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। लिखित मांग पत्र जारी कर श्रमिकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें बोर्ड रेट के अनुसार भुगतान नहीं किया जा रहा, जबकि ओवरटाइम का पैसा भी तय नियमों के मुताबिक नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग रखी है कि ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट से किया जाए और वेतन हर महीने 1 से 7 तारीख के बीच अनिवार्य रूप से दिया जाए।
मामला यहीं नहीं रुकता। श्रमिकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्लांट में काम के दौरान किसी हादसे की स्थिति में पूरा इलाज और रिस्क कवर कंपनी की जिम्मेदारी होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े पावर प्लांट में काम करने वाले मजदूर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। साफ पीने का पानी और शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर श्रमिकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह उनके स्वास्थ्य और सम्मान दोनों के साथ समझौता है।
श्रमिकों ने महीने में 26 दिन काम और सभी राष्ट्रीय अवकाश पर सवैतनिक छुट्टी की मांग भी रखी है। साथ ही पीएफ कटौती का पूरा और पारदर्शी हिसाब देने की बात भी कही गई है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रबंधन इन मांगों को गंभीरता से लेगा या फिर मामला टकराव की ओर बढ़ेगा। फिलहाल, अडानी पावर प्लांट में उठी यह आवाज आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।



