Absentee MLA : भाजपा के 17 विधायक ​थे गैर​हाजिर…! गृह विभाग की अनुदान मांग पर विपक्ष ने कर दी मत विभाजन की मांग

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Absentee MLA

रायपुर, 10 मार्च। Absentee MLA : छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को उस समय सत्ता पक्ष असहज सा हो गया जब गृह विभाग के अनुदान मांगों पर विपक्ष ने कटौती का प्रस्ताव रखा। मंजूर ना होने पर अनुदान पास करने के लिए विपक्ष ने मत विभाजन की मांग कर दी।

उधर जैसे ही आसंदी ने मत विभाजन की मांग को स्वीकार किया अफसर और सत्ता के विधायक मंत्री इधर-उधर भागते-दौड़ते दिखे। इस दौरान भाजपा के कुल 54 विधायक हैं और 17 विधायक अनुपस्थित रहे। वहीं विपक्ष के भी 10 विधायक गैर हाजिर थे। राज्य के 25 वर्ष के इतिहास में पहली बार गृह विभाग की अनुदान मांगे मत विभाजन की मांग उठी।

कैबिनेट की बैठक से उठकर सदन पहुंचे सीएम और मंत्री

मत विभाजन की सूचना पर सीएम साय और अन्य मंत्री भी कैबिनेट की बैठक से उठकर सदन पहुंचे। जिसके बाद आसंदी ने वोटिंग के की व्यवस्था दे दी। हालांकि संख्याबल सत्तापक्ष के साथ था सो सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की वोटिंग के बाद अनुदान मांगें पास हो गईं। विपक्ष की ओर से 24 और सत्तापक्ष की ओर से 37 वोट पड़े। इसी के साथ गृह विभाग की अनुदान मांगे मत विभाजन से पारित हो गया।

बलरामपुर में अफीम की खेती भूपेश और महंत ने गृहमंत्री को घेरा

गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सबसे ज्यादा नोक झोंक होती रही। खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गृहमंत्री को घेरने का प्रयास करते रहे। उन्होंने इसी दौरान बलरामपुर में भी अफीम की खेती की बात रख दी। चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष महंत ने भी केंद्र द्वारा सुरक्षाबलों की तैनाती के बदले केंद्र की ओर से पैसों की मांग की बात उठा दी।

सुरक्षा बलों की तैनाती पर केंद्र के पैसे मांगने की बात उठाई, महंत ने पूछा.आख़िर राज्य सरकार यह राशि किस बजट से देगी

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा- केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य सरकार को पत्र भेज पैसा मांगा है। प्रदेश में अर्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए पैसा माँगा गया है। केंद्र ने छत्तीसगढ़ से 21 हज़ार 530 करोड़ रुपए मांगे हैं। CM साय ने इस राशि को माफ करने के लिए केंद्र को पत्र भी लिखा है। गृह मंत्रालय ने 4 किस्तों में राशि देने की बात कही है। महंत ने पूछा कि, आख़िर राज्य सरकार यह राशि किस बजट से देगी? उन्होंने कहा कि, UPA सरकार में केंद्र से राशि नहीं मांगी जाती थी।

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