कोरबा

Coal Block Case : कोरबा के कोल ब्लॉक मामले में ED को झटका…! कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस लेने से किया इनकार…राठी स्टील को राहत

राउज एवेन्यू कोर्ट ने ED की दलीलों को माना बेबुनियाद

नई दिल्ली, 09 मार्च। Coal Block Case : कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले में Enforcement Directorate को बड़ा झटका लगा है। Rouse Avenue Court के स्पेशल जज Dheeraj Mor ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ईडी ऐसा क्षेत्राधिकार नहीं ले सकती, जो उसे कानून ने नहीं दिया है।

राठी स्टील पर लगाया गया था आरोप

यह मामला छत्तीसगढ़ के केसला नॉर्थ कोल ब्लॉक के वर्ष 2008 में हुए आवंटन से जुड़ा है। ईडी ने Rathi Steel and Power Limited (RSPL) और उसके तीन अधिकारियों, पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर Udit Rathi, सीईओ Pradeep Rathi और एक पूर्व मैनेजर, पर आरोप लगाया था कि उन्होंने गलत बयानी के जरिए कोल ब्लॉक हासिल किया।

ईडी का दावा था कि यह आवंटन ‘क्राइम से प्राप्त संपत्ति’ का हिस्सा है और कंपनी ने इसके आधार पर शेयर कैपिटल बढ़ाकर करीब 3.08 करोड़ रुपये का लाभ उठाया।

अदालत ने ED को लिया आड़े हाथ

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला ईडी द्वारा ऐसे क्षेत्राधिकार ग्रहण करने का उदाहरण है, जो रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से मेल नहीं खाता। अदालत ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA) की धारा 3 का हवाला देते हुए कहा कि ‘क्राइम से प्राप्त संपत्ति’ का अस्तित्व ही स्थापित नहीं हो पाया।

जज ने स्पष्ट किया कि 5 अगस्त 2008 को जारी कोल ब्लॉक आवंटन पत्र केवल एक प्रारंभिक कदम था, जो माइनिंग लीज के लिए प्राथमिकता देता है। इससे कंपनी को तत्काल कोई अधिकार, टाइटल या हित प्राप्त नहीं होता। ऐसे में इसे ‘क्राइम से प्राप्त संपत्ति’ नहीं माना जा सकता।

अदालत ने ईडी के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि कंपनी ने आवंटन पत्र के आधार पर 14 लाख शेयर जारी कर आर्थिक फायदा उठाया। अदालत के अनुसार आवंटन के बाद भी कंपनी के शेयरों की कीमत घटी, जो बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर थी, न कि कोल ब्लॉक पर।

अटैच संपत्तियों को डी-अटैच करने का आदेश

अदालत ने ईडी की जांच को बेबुनियाद धारणाएं, भ्रम और अनुमान पर आधारित बताया। साथ ही ईडी द्वारा अटैच की गई लगभग 30 लाख रुपये की संपत्तियों को भी डी-अटैच करने का आदेश दिया।

CBI जांच से निकला था मामला

यह केस Central Bureau of Investigation की भ्रष्टाचार जांच से सामने आया था। वर्ष 2016 में अदालत ने इस मामले में आरोपियों को दोषी ठहराया था। सीबीआई का आरोप था कि आरोपियों ने भूमि से जुड़े दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया ताकि 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित कर दे।

ईडी ने इसी आधार पर PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। अदालत के इस फैसले को जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। राठी स्टील के लिए यह फैसला राहत भरा है, जबकि ईडी के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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