Fake Caste Certificate : फर्जी जाति प्रमाण-पत्र पर बड़ा एक्शन…! चीफ इंजीनियर का SC सर्टिफिकेट निरस्त…9 साल की शिकायत के बाद बड़ा फैसला

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Fake Caste Certificate

रायपुर, 06 मार्च। Fake Caste Certificate : रायपुर में जाति प्रमाण-पत्र मामले में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने बड़ा फैसला सुनाया है। समिति ने प्रधानमंत्री सड़क योजना के चीफ इंजीनियर के.के. कुटारे के अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण-पत्र को गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद कुटारे पर सेवा से बर्खास्तगी की संभावना भी बढ़ गई है।

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा की गई, जिसके चेयरमैन प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा हैं। समिति में अन्य सदस्यों के रूप में डॉ. सारांश मित्तर, विनीत नंदनवार, रितुराज रघुवंशी, रमा उइके, डॉ. अनिल वितुलकर और हिना अनिमेष नेताम शामिल हैं।

9 साल की शिकायत के बाद बड़ा फैसला

समिति को मुख्य अभियंता कुटारे के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी करने की शिकायतें मिली थीं। बताया गया कि डोंगरगांव जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौकर और विजय मिश्रा ने वर्ष 2017 से 2025 के बीच कई बार शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला शासन के आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग तक पहुंचा और जांच शुरू की गई।

समिति ने सुनवाई के लिए कुटारे को 28 जनवरी 2026 और 5 फरवरी 2026 को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। बाद में 23 फरवरी 2026 को फिर से मामला समिति के समक्ष रखा गया। इस दौरान कुटारे ने अपने पक्ष में बताया कि उनके पिता वर्ष 1953 से बालाघाट में नौकरी कर रहे थे और इसी आधार पर उन्होंने 1978 में वारासिवनी तहसील से जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया था।

हालांकि जांच में सामने आया कि उनका मूल निवास तुमसर बताया गया है। इस संदर्भ में समिति ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के 1994 के महत्वपूर्ण फैसले एक्शन कमेटी ऑन इश्यू ऑफ कास्ट सर्टिफिकेट बनाम भारत संघ का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अनुसूचित जाति और जनजाति का लाभ उसी राज्य में मान्य होता है जहां व्यक्ति मूल रूप से निवास करता है।

दस्तावेजों की जांच में तुमसर नगर पालिका के 1935 के जन्म रजिस्टर की प्रति भी मिली, जिसमें आवेदक के दादा झुकल्या-गोविंदा का नाम दर्ज है और उनकी जाति खटीक बताई गई है। इन दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर समिति ने कुटारे के अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। समिति के इस फैसले के बाद अब के.के. कुटारे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी की संभावना बढ़ गई है।

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